भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 324, कुल 800 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 324

३२६. बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् सिंह की ४ रेखाओं में से ४ घटाने से सिंह राशि में ० शून्य रहेगा एवं धनराशि की ६ रेखाओं में से ४ घटाने से धन राशि में २ रहेगा। अर्थात् त्रिकोण-शोधन के बाद मेष में १, सिंह में शून्य एवं धन में २ फल आया। इसी प्रकार उपर्युक्त नियम के अनुसार सूर्यादि सात ग्रहों और लग्न के अष्टक वर्ग का त्रिकोण-शोधन करना चाहिए। कहीं २ निम्नलिखित प्रकार से भी अष्टक वर्ग लिखने की प्रथा है— सूर्याष्टकवर्गः ४८ चन्द्राष्टकवर्गः ४९ [सूर्याष्टकवर्गः] मेष (१): रेखाएं ५ (।।।।।) वृष (२): रेखाएं ४ (।।।।) मिथुन (३): रेखाएं ४ (।।।।), चं., शु. कर्क (४): रेखाएं ३ (।।।), सू. सिंह (५): रेखाएं ५ (।।।।।), बु. कन्या (६): रेखाएं ५ (।।।।।), बृ. तुला (७): रेखाएं ४ (।।।।) वृश्चिक (८): रेखाएं ५ (।।।।।), श. धनु (९): रेखाएं ६ (।।।।।।) मकर (१०): रेखाएं ३ (।।।) कुम्भ (११): रेखाएं ३ (।।।), मं. मीन (१२): रेखाएं ४ (।।।।) [चन्द्राष्टकवर्गः] मेष (१): रेखाएं ५ (।।।।।) वृष (२): रेखाएं ३ (।।।) मिथुन (३): रेखाएं ५ (।।।।।), चं., शु. कर्क (४): रेखाएं २ (।।), सू. सिंह (५): रेखाएं ४ (।।।।), बु., बृ. कन्या (६): रेखाएं ३ (।।।) तुला (७): रेखाएं ५ (।।।।।), श. वृश्चिक (८): रेखाएं ४ (।।।।) धनु (९): रेखाएं ५ (।।।।।) मकर (१०): रेखाएं २ (।।) कुम्भ (११): रेखाएं ३ (।।।), मं. मीन (१२): रेखाएं ६ (।।।।।।) भौमाष्टकवर्गः ३९ बुधाष्टकवर्गः ५४ [भौमाष्टकवर्गः] मेष (१): रेखाएं ३ (।।।) वृष (२): रेखाएं ४ (।।।।) मिथुन (३): रेखाएं ४ (।।।।), शु., चं. कर्क (४): रेखाएं २ (।।), सू. सिंह (५): रेखाएं ३ (।।।), बु., बृ. कन्या (६): रेखाएं ३ (।।।) तुला (७): रेखाएं २ (।।) वृश्चिक (८): रेखाएं ६ (।।।।।।), श. धनु (९): रेखाएं ३ (।।।) मकर (१०): रेखाएं ४ (।।।।) कुम्भ (११): रेखाएं २ (।।), मं. मीन (१२): रेखाएं ३ (।।।) [बुधाष्टकवर्गः] मेष (१): रेखाएं ४ (।।।।) वृष (२): रेखाएं ४ (।।।।) मिथुन (३): रेखाएं ५ (।।।।।) कर्क (४): रेखाएं ५ (।।।।।), सू. सिंह (५): रेखाएं ५ (।।।।।), बु., बृ. कन्या (६): रेखाएं ५ (।।।।।) तुला (७): रेखाएं ४ (।।।।) वृश्चिक (८): रेखाएं ५ (।।।।।), श. धनु (९): रेखाएं ४ (।।।।) मकर (१०): रेखाएं ५ (।।।।।) कुम्भ (११): रेखाएं ४ (।।।।), मं. मीन (१२): रेखाएं ४ (।।।।) गुर्वष्टकवर्गः ५६ शुक्राष्टकवर्गः ५२ [गुर्वष्टकवर्गः] मेष (१): रेखाएं ५ (।।।।।) वृष (२): रेखाएं ५ (।।।।।) मिथुन (३): रेखाएं ३ (।।।), शु., चं. कर्क (४): रेखाएं ४ (।।।।), सू. सिंह (५): रेखाएं ५ (।।।।।), बु., बृ. कन्या (६): रेखाएं ४ (।।।।) तुला (७): रेखाएं ६ (।।।।।।) वृश्चिक (८): रेखाएं ५ (।।।।।), श. धनु (९): रेखाएं ४ (।।।।) मकर (१०): रेखाएं ५ (।।।।।) कुम्भ (११): रेखाएं ६ (।।।।।।), मं. मीन (१२): रेखाएं ४ (।।।।) [शुक्राष्टकवर्गः] मेष (१): रेखाएं ५ (।।।।।) वृष (२): रेखाएं ४ (।।।।) मिथुन (३): रेखाएं ६ (।।।।।।), चं., शु. कर्क (४): रेखाएं ५ (।।।।।), सू. सिंह (५): रेखाएं ५ (।।।।।), बु., बृ. कन्या (६): रेखाएं ४ (।।।।) तुला (७): रेखाएं ४ (।।।।) वृश्चिक (८): रेखाएं १ (।) श. धनु (९): रेखाएं ३ (।।।) मकर (१०): रेखाएं ६ (।।।।।।) कुम्भ (११): रेखाएं ५ (।।।।।), मं. मीन (१२): रेखाएं ४ (।।।।)