बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ पिंडोत्पत्याध्यायः ३२९ शेष अंक को) गुणाकर गणन फल को उस राशि के नीचे रख दे। यदि एक राशि में दो-तीन ग्रह हों तो उनके गुणकों से अलग-अलग उस संख्या को गुणाकर सभी का योगकर उस राशि के नीचे रखना चाहिए। गुरु, भौम, शुक्र और बुध का क्रम से १०, ८, ७, ५, गुणक है।।३।। बुधस्य संख्या शेषाणां ग्रहगुणैर्गुणयेत्क्रमात्। सर्वेषां फलयोगोऽपि पिण्डमानं प्रकथ्यते ।।४।। इस प्रकार गुरु का १०; भौम का ८, शुक्र का ७, बुध का ५ और शेष ग्रहों का ५ गुणक है। सभी फलों के योग को पिण्ड कहते हैं।।४।। | राशि | मे. | वृ. | मि. | क. | सिं. | क. | तु. | वृ. | ध. | मं. | कुं. | मी. | | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | | गुणक | ७ | १० | ८ | ४ | १० | ५ | ७ | ८ | ९ | ५ | ११ | १२ |
| ग्रह | सू. | चं. | मं. | बु. | बृ. | शु. | श. |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| गुणक | ५ | ५ | ८ | ५ | १० | ७ | ५ |
| सूर्याष्टकवर्गशोधनम् | |||||||
| जन्मकालीन ग्रहाः | चं. शु. | सू. | बु. बृ. | ||||
| :--- | :---: | :---: | :---: | :---: | :---: | :---: | :---: |
| राशयः | १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ |
| रेखा | ५ | ५ | ४ | ३ | ४ | २ | ४ |
| त्रिकोण शोधन | १ | ३ | १ | ० | ० | ० | १ |
| एकाधिपत्य शोधन | १ | २ | ० | ० | ० | ० | १ |
| राशिगुणन फल | ७ | २० | ० | ० | ० | ० | ७ |
| ग्रहगुणन फल | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० |