भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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३२८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् रख दे (२)। यदि ग्रहयुक्त राशि की संख्या अधिक हो और ग्रहहीन राशि में अल्प संख्या हो तो ग्रहहीन राशि में शून्य और ग्रहयुक्त राशि की संख्या यथावत् रखनी चाहिए (३)। यदि दोनों राशियाँ ग्रहयुक्त हों तो संशोधन नहीं करना चाहिए, यानि दोनों जगह यथावत् अंक रहने दे (४)। यदि एक ग्रहयुक्त हो और दूसरी राशि ग्रहहीन तथा दोनों की संख्या बराबर हो तो ग्रहहीन राशि के नीचे शून्य और ग्रहयुक्त राशि के नीचे वही संख्या रहेगी (५)। यदि दोनों ग्रहयुक्त वा ग्रहहीन हों अथवा दोनों में एक ग्रहयुक्त और एक ग्रहहीन हो किन्तु त्रिकोण-शोधन में किसी एक में शून्य हो तो दोनों में शून्य ही होगा (६)। कर्क और सिंह राशि के फल ज्यों के त्यों रहते हैं, इनमें एकाधिपत्य शोधन नहीं किया जाता है ।। १२-१६ ।। इति एकाधिपत्यशोधनम्। अथ पिण्डोत्पत्त्याध्यायः शोध्यावशेषं संस्थाप्य राशिमानेन वर्धयेत्। ग्रहयुक्तेऽपि तद्राशौ ग्रहमानेन वर्धयेत् ।।१।। एकाधिपत्य शोधन के उपरान्त जिस राशि के नीचे जो संख्या हो उसे उस राशि के नीचे रखकर उस राशि के गुणक से गुणा करे। यदि राशि में ग्रह हो तब भी उस संख्या को उस ग्रह के गुणक से गुणा कर फल को उसके नीचे रख दे।।१।। अथ राशि-ग्रहगुणकध्रुवाङ्कानाह- गोसिंहौ दशगुणितौ दशभिर्मिथुनालिनौ। वणिग्मेषौ तु मुनिभिः कन्यकामकरौ शरैः।।२।। वृष-सिंह राशि को १० से, मिथुन-वृश्चिक को १० से, तुला और मेष को ७ से, कन्या-मकर को ५ से।।२।। शेषाः स्वमानतो गण्या ग्रहगुणकमथोच्यते। जीवारशुक्रसौम्यानां दशाष्टमुनिसायकाः ।।३।। और शेष राशियों को उनकी संख्या से ( एकाधिपत्य शोधन के उपरान्त जो अंक जिस राशि के नीचे है उसे गुणाकर गुणन फल को राशि के नीचे रखना चाहिए। इसी प्रकार जिस राशि में जो ग्रह हो उस ग्रह के गुणक से राशि के नीचे वाले की संख्या (एकाधिपत्य शोधनोपरान्त