बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें.३६ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् अथ बलचक्रम् | उच्च | मूलत्रिकोण | स्वर्क्षं | मित्र क्षेत्र | सम | नीच अस्त | शत्रु | | १ | ० | ० | .० | ७ | ० | ० | | ० | ४५ | ३० | १५ | ३० | ० | ० | अथ धूमाद्यप्रकाशग्रहानयनमाह- सदा चतुर्भिः विश्वांशैः नखलिप्ताधिको रविः। धूमो नाम महादोषः सर्वकर्मविनाशकः।।५३।। सूर्य में ४ राशि १३ अंश २० कला जोड़ देने से धूम नाम का महादोष होता है, जो कि सभी कार्यों का विनाशक होता है।।५३।। धूमो मण्डलतः शुद्धो व्यतीपातोऽत्र दोषदः। सषड्भेऽत्र व्यतीपाते परिवेषस्तु दोषदः।।५४।। धूम को १२ राशि में घटा देने से 'शेष व्यतीपात नाम का दोष होता है। व्यतीपात में ६ राशि जोड़ देने से परिवेष नाम का दोष होता है।।५४।। परिवेषश्युतश्चक्रादिन्द्रचापस्तु दोषदः। त्र्यंशोनात्यष्ट्यंशा युतश्चापः केतुग्रहो भवेत्।।५५।। परिवेष को १२ राशि में घटाने से इन्द्रचाप नामक दोष होता है। १७ अंश में अंश का तृतीयांश १० कला घटाने से शेष १६°।४०' इन्द्रचाप में जोड़ने से केतु नाम का दोष होता है।।५५।। एकराशियुते केतौ सूर्यः स्यात्पूर्ववत्समः। अप्रकाशग्रहाश्चैते दोषाः पापग्रहाः स्मृताः।।५६।। केतु में १ राशि जोड़ देने से पूर्वोक्त सूर्य के तुल्य हो जाता है। यही अप्रकाशग्रह हैं, जो कि दोषरूप पापग्रह हैं।।५६।। उदाहरण-स्पष्ट सूर्य ३।१०।२६।२९ इसमें ४ राशि १३ अंश २० कला जोड़ने से ८।१।४६।२० धूम ग्रह हुआ। इसको १२ राशि में घटाने से ३।२८।१३।४० यह व्यतीपात ग्रह हुआ। इसमें ६ राशि जोड़ने से ९।२८।१३।४० यह परिवेष ग्रह हुआ। इसे १२ राशि में घटाने से २।१।४६।२० यह इन्द्रचाप हुआ। इसमें १६ अंश. ४० कला जोड़ने से २।१८।२६।२० यह केतु ग्रह हुआ। इसमें १ राशि जोड़ने से पूर्वोक्त सूर्य के तुल्य ३।१८।२६।२० हुआ।