बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
DevanagariHindipublished800 पृष्ठ
पृष्ठ 33, कुल 800 में से
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ग्रहस्वरूपाध्यायः ३५ अथ तात्कालिकमैत्रीचक्रम्
| सू. | चं. | मं. | बु. | बृ. | शु. | श. | ग्रहाः |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| चं. बु.<br>बृ. शु. | सू. बु.<br>बृ. शु. | श. | सू. चं.<br>बृ. शु.<br>श. | सू. चं.<br>बु. शु.<br>श. | सू. चं.<br>बु. बृ. | मं. बु.<br>बृ. | मित्राणि |
| मं. श. | मं. श. | सू. चं.<br>बु. बृ.<br>शु. | मं. | मं. | मं. श. | सू. चं.<br>शु. | शत्रवः |
अथ पञ्चधा मैत्रीचक्रम्
| सू. | चं. | मं. | बु. | बृ. | शु. | श. | ग्रहाः |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| चं. बृ. | सू. बु. | सू. शु. | सू. चं. | बु. | बु. | अधिमित्राणि | |
| बु. | बृ. शु. | चं. बृ.<br>श. | श. | मं. बृ. | बृ. | मित्राणि | |
| मं. गु. | सू. चं.<br>बृ. श. | मं. | मं. बु.<br>शु. | सू. चं.<br>श. | मं. शु. | समाः | |
| मं. | शु. | शत्रवः | |||||
| श. | श. | बु. | सू. चं. | अधिशत्रवः |
अथ ग्रहाणामुच्चादिबलमाह— स्वोच्चे शुभं बलं पूर्ण त्रिकोणे पादवर्जितम्। स्वर्क्षे दलं मित्रगेहे पादमात्रं प्रकीर्त्तितम्॥५१॥ यदि ग्रह अपनी उच्च राशि में हो तो सम्पूर्ण शुभ बल, अपने मूलत्रिकोण राशि में हो तो ३ चरण, अपनी राशि में हो तो आधा बल, मित्र की राशि में हो तो १ चरण है॥५१॥ पादार्धं समभे प्रोक्तं व्यर्थं नीचास्तशत्रुभे। तद्वद्दुष्टबलं ब्रूयाद् व्यत्ययेन विचक्षणः॥५२॥ सम की राशि में हों तो आधा बल प्राप्त करता है। नीच अस्त और शत्रु की राशि में हो तो शून्य बल पाता है। इसके विपरीत शेष अशुभ बल पाता है॥५२॥