बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३५२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् जिस राशि में ३७ रेखा हों उस मास में धन का लाभ होता है। जिस राशि में ३८ रेखा हों उस मास में धनसुख होता है। जिस राशि में ३९ रेखा हों उसमें द्रव्य-रत्न का लाभ होता है।।८६।। धनवान्कीर्तिमांश्चैव चत्वारिंशति वर्धते। अत ऊर्ध्वं यशोऽर्थाप्तिः पुण्यश्रीरुपचीयते।।८७।। जिस राशि में ४० रेखा हों उस मास में धन-कीर्ति में वृद्धि होती है। इसके बाद जितनी ही अधिक रेखा होती है उतना ही अधिक यश-धन का लाभ उत्तरोत्तर होता है।।८७।। अथ शुभाशुभफलमाह- शुभखचरफलैक्यं प्राप्तवर्षे नितान्तं धनतनयसुखानां भाजनं स्यान्मनुष्यः। धरणितनयवर्गे बिन्दुसंज्ञांतयोगे तनुलयमिह वर्षे पापगे मृत्युभीतिः।।८८।। शुभग्रह की रेखाओं के योगतुल्य वर्ष में धन, पुत्र, सुख को भोगने वाला मनुष्य होता है। भौमाष्टक वर्ग में भौम से लग्नांत फलों के योगतुल्य वर्ष और लग्न से भौमांत रेखाओं के योगतुल्य वर्ष में पापग्रह का योग होने से कष्ट होता है।।८८।। इति बृहत्पाराशरहोरायाम् अष्टकवर्गफलाध्यायः। अथ पूर्वजन्मशापद्योतकाध्यायः पार्वत्युवाच- देवदेव जगन्नाथ शूलपाणे वृषध्वज। केन योगेन मर्त्यानां जायते शिशुनाशनम् ।।१।। पार्वतीजी ने कहा- हे देवों के देव, जगत् के स्वामी, शूलपाणि, वृषध्वज! किस दुर्योंग के कारण मनुष्यों की सन्तानों का नाश होता है।।१।। तत्सर्वमत्र योगेन ब्रूहि मे शशिशेखर। शापमोक्षं च कृपया प्राणिनामल्पमेधसाम् ।।२।। और हे शशिशेखर ! उन सभी योगों को मुझे बताइये और उस शाप से कैसे मनुष्य मुक्त हो सकता है इसे भी बताने की कृपा करें।।२।।