बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
पृष्ठ 357, कुल 800 में से
संदर्भ में पढ़ेंअथ पूर्वजन्मशापद्योतकाध्यायः ३५९ अष्टमेश पाँचवें भाव में और पंचमेश आठवें भाव में हो और चन्द्रमा तथा सुखेश ६, ८, १२ भाव में हो तो माता के शाप से संतान की हानि होती है।।४२।। चन्द्रक्षेत्रे यदा लग्ने कुजराहुसमन्विते। चन्द्रमन्दौ पुत्रसंस्थौ मातृशापात्सुतक्षयः।।४३।। यदि कर्क राशि लग्न में हो तथा भौम-राहु से युत हो; चन्द्र-शनि पाँचवें भाव में हों तो माता के शाप से संतान की हानि होती है।।४३।। लग्ने पुत्रे रन्ध्ररिःफे आरराहुर्विः शनिः। मातृलग्नाधिपौ दुःस्थौ मातृशापात्सुतक्षयः।।४४।। लग्न, पंचम, आठवें, बारहवें भाव में भौम, राहु, रवि और शनि हों तथा मातृभावेश ६, ८, १२ में हो तो माता के शाप से संतान की हानि होती है।।४४।। नाशस्थानं गते जीवे कुजराहुसमन्विते। पुत्रस्थाने मन्दचन्द्रौ मातृशापात्सुतक्षयः।।४५।। आठवें भाव में भौम-राहु से युक्त गुरु हो और पाँचवें भाव में शनि- चन्द्र हों तो माता के शाप से संतान की हानि होती है।।४५।। ग्रहयोगपदैः सर्वं फलं ब्रूयाद्विचक्षणः। शुभे सौख्यं विनिर्दिष्टं मिश्रे मिश्रं प्रकीर्त्तितम् ।।४६।। ग्रहयोगवश सभी फलों को करे। शुभयोग से शुभ फल, पापयोग से पापफल तथा मिश्रयोग से मिश्रित फल कहना चाहिए।।४६।। अथास्य शान्तिमाह— सेतुस्नानं प्रकुर्वीत गायत्री लक्षसंज्ञके। ग्रहदानं च कर्त्तव्यं रौप्यपात्रे पयःस्थितिः।।४७।। एक लक्ष गायत्री का जप कराके वा करके सेतुस्नान करे। ग्रहदान और चाँदी के पात्र में दूध का दान करे।।४७।। ब्राह्मणान् भोजयेत्तद्वदश्वत्थस्य प्रदक्षिणम्। कर्तव्यं भक्तियुक्तेन चाष्टविंशसहस्रकम् ।।४८।। ब्राह्मणों को भोजन करावे और भक्ति से युक्त होकर २८ हजार पीपल की प्रदक्षिणा करे।।४८।।