बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३६२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् पीपल के वृक्ष की स्थापना कर दस गौ का दान करे, इसके बाद प्राजापत्य करके भूमि का दान करे। इस प्रकार भक्तिपूर्वक करने से पुत्र की वृद्धि होती है॥६१॥ अथ मातुलात्सुतक्षययोगः- पुत्रस्थाने बुधे जीवे कुजराहुसमन्विते। लग्ने मन्दसमायोगे मातुलात्सुतनाशनम् ॥६२॥ यदि पाँचवें भाव में बुध, गुरु, भौम, राहु हों, लग्न में शनि हो तो मामा के शाप से सन्तान की हानि होती है॥६२॥ लग्नपुत्रेश्वरौ पुत्रे शनिभौमबुधान्विते । ज्ञेयो मातुलशापत्त्वात्पुत्रसन्ततिनाशनम् ॥६३॥ लग्नेश और पंचमेश शनि, भौम, बुध के साथ एकत्र हों तो मामा के शाप से संतान की हानि होती है॥६३॥ लुप्ते पुत्राधिपे लग्ने सप्तमे भानुनन्दने। लग्नेशे बुधसंयुक्ते तस्य सन्ततिनाशनम् ॥६४॥ लग्नेश अस्त होकर लग्न में हो और सातवें भाव में शनि हो और लग्नेश बुध के साथ हो तो मामा के शाप से संतान की हानि होती है॥६४॥ ज्ञातिस्थानाधिपे लग्ने व्ययेशेन समन्विते। शशिसौम्यकुजे पुत्रे तस्य सन्ततिनाशनम् ॥६५॥ व्ययेश से युत होकर सुखेश लग्न में हो और चन्द्रमा, बुध, भौम संतान भाव में हों तो मामा के शाप से संतान की हानि होती है॥६५॥ अस्य शान्तिमाह- तद्दोषपरिहारार्थं विष्णुस्थापनमुच्यते। वापीकूपतडागादेर्निर्माणं सेतुबन्धनम् ॥६६॥ उपर्युक्त दोष की शान्ति के लिए विष्णु की स्थापना करे। बावली, कूआँ, तालाब को बनवाये॥६६॥ पुत्रवृद्धिर्भवेत्तस्य सम्पद्वृद्धिः प्रजायते। एवं योगग्रहेणैव फलं ब्रूयाद्विचक्षणैः ॥६७॥ पुल का निर्माण करावे तो पुत्र की वृद्धि, संपत्ति की भी वृद्धि होती है। इस प्रकार ग्रहयोगवश पंडित लोग फल का विचार करें॥६७॥