भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 361, कुल 800 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 361

अथ पूर्वजन्मशापद्योतकाध्यायः ३६३ ब्रह्मशापात्सुतक्षययोगः— गुरुक्षेत्रे यदा राहुः पुत्रे जीववारभानुजाः। धर्मस्थानाधिपे नाशे ब्रह्मशापात्सुतक्षयः।।६८।। यदि गुरु की राशि (९, १२) में राहु हो, पाँचवें भाव में गुरु, भौम, शनि हों और धर्मेश आठवें भाव में हो तो ब्रह्म (ब्राह्मण) के शाप से संतान का अभाव होता है।।६८।। विद्याबलेन यो मर्त्यो ब्राह्मणानवमन्यते। तद्दोषाद्ब्रह्मशापाच्च तस्य सन्ततिनाशनम्।।६९।। विद्या वा बलप्रयोग से जो कोई ब्राह्मण का अपमान करता है, उसके दोष और ब्राह्मण के शाप से वह संतानहीन होता है।।६९।। धर्मेशे पुत्रभावस्थे पुत्रेशे नाशराशिगे। जीववारराहुमृत्युस्थे ब्रह्मशापात्सुतक्षयः।।७०।। धर्मेश पाँचवें भाव में हो और पंचमेश धर्म भाव में हो तथा गुरु, भौम, राहु आठवें भाव में हों तो ब्रह्मशाप से संतान का अभाव होता है।।७०।। धर्माधिपे नीचगते व्ययेशे पुत्रराशिगे। राहुयुक्तेक्षिते वापि ब्रह्मशापात्सुतक्षयः।।७१।। धर्मेश अपनी नीचराशि में हो और व्ययेश पंचम भाव में हो, राहु से युत वा दृष्ट हो तो ब्रह्मशाप से संतान का अभाव होता है।।७१।। जीवे नीचगते राहुर्लग्ने वा पुत्रराशिगे। पुत्रस्थानाधिपे दुःस्थे ब्रह्मशापात्सुतक्षयः।।७२।। गुरु नीचराशि में हो, राहु लग्न वा पंचम भाव में हो और पंचमेश ६, ८, १२ भाव में हो तो ब्रह्मशाप से संतान का अभाव होता है।।७२।। पुत्रस्थानाधिपे जीवे रन्ध्रे पापसमन्विते। पुत्रेशावार्कचन्द्रौ वा ब्रह्मशापात्सुतक्षयः।।७३।। पंचमेश गुरु आठवें भाव में पापग्रह से युक्त हो अथवा पंचमेश रवि- चन्द्र हों तो भी ब्रह्मशाप से संतान का अभाव होता है।।७३।। मन्दांशे मन्दसंयुक्ते जीवे भौमसमन्विते। पुत्रेशे व्ययराशिस्थे ब्रह्मशापात्सुतक्षयः।।७४।।