भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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३६४ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् शनि के अंश में शनि-भौम संयुक्त गुरु हो, पंचमेश बारहवें भाव में हो तो ब्रह्मशाप से संतान का अभाव होता है॥७४॥ लग्ने गुरुयुते मन्दे भाग्ये राहुसमन्विते। व्यये गुरुसमायुक्ते ब्रह्मशापात्सुतक्षयः॥७५॥ लग्न में गुरु हो, शनि-राहु से युक्त हो, भाग्यभाव में और गुरु व्यय भाव में हो तो ब्रह्मशाप से संतान का अभाव होता है॥७५॥ अस्य शान्तिमाह- तस्य दोषस्य शान्त्यर्थं कुर्याच्चान्द्रायणं नरः। ब्रह्मकूर्चत्रयं कृत्वा धेनुर्दद्यात्सदक्षिणाम्॥७६॥ उस दोष की शान्ति के लिए चान्द्रायण एवं ब्रह्मकूर्च व्रत (प्रायश्चित्त) करके दक्षिणा सहित गोदान॥७६॥ पञ्चरत्नानि देयानि सुवर्णेन समन्वितम्। अन्नदानं ततः कुर्यादयुतं च सहस्रकम्॥७७॥ और पंचरत्न सोने के साथ दान करके दस हजार वा एक हजार का अन्नदान करें॥७७॥ एवं कृते तु सत्पुत्रं लभते नात्र संशयः। मुक्तशापो विशुद्धात्मा स पुत्रसुखमेधते॥७८॥ ऐसा करने से मनुष्य शाप से मुक्त होकर पुत्र को प्राप्त करता है और शापमुक्त होकर शुद्धात्मा होकर सुख को भोगता है॥७८॥ पत्नीशापात्सुतक्षययोगः- दारेशे पुत्रभावस्थे दारेशस्थांशपे शनौ। पुत्रेशे नाशराशिस्थे पत्नीशापात्सुतक्षयः॥७९॥ सप्तमेश पंचम भाव में हो तथा सप्तमेश के नवांश का स्वामी शनि हो, पंचमेश आठवें भाव में हो तो स्त्री के शाप से संतान की हानि होती है॥७९॥ कलत्रेशे नाशसंस्थे रिःफेशे पुत्रराशिगे। कारके पापसंयुक्ते पत्नीशापात्सुतक्षयः॥८०॥ सप्तमेश आठवें भाव में और व्ययेश पाँचवें भाव में हो, कारक (शुक्र) पापयुक्त हो तो स्त्री के शाप से संतान का अभाव होता है॥८०॥