भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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पृष्ठ 363

अथ पूर्वजन्मशापद्योतकाध्यायः ३६५ पुत्रस्थानगते शुक्रे कामपे रन्ध्रमाश्रिते। कारके पापसंयुक्ते पत्नीशापात्सुतक्षयः॥८१॥ पंचम स्थान में शुक्र हो, सप्तमेश आठवें भाव में हो तथा कारक पापयुक्त हो तो स्त्रीशाप से संतान का अभाव होता है॥८१॥ कुटुम्बे पापसम्बन्धे कामेशे नाशराशिगे। पुत्रे पापग्रहैर्युक्ते पत्नीशापात्सुतक्षयः॥८२॥ दूसरे भाव में पापग्रह हो, सप्तमेश आठवें भाव में हो और पाँचवें भाव में पापग्रह युत हों तो स्त्री के शाप से संतान का अभाव होता है॥८२॥ भाग्यस्थानगते शुक्रे दारेशे नाशराशिगे। लग्ने पापे सुते पापे पत्नीशापात्सुतक्षयः॥८३॥ नवम भाव में शुक्र, पंचमेश आठवें भाव में तथा लग्न और पाँचवें में पापग्रह हों तो स्त्री के शाप से संतान का अभाव होता है॥८३॥ भाग्यस्थानाधिपे शुक्रे पुत्रेशे शत्रुराशिगे। गुरुलग्नेशदारेशा दुःस्थाः सन्ततिनाशनम्॥८४॥ भाग्येश शुक्र हो, पंचमेश छठे स्थान में हो और गुरु, लग्नेश, दारेश ६, ८, १२ भावों में हों तो स्त्रीशाप से संतान का अभाव होता है॥८४॥ पुत्रस्थाने भृगुक्षेत्रे राहुचन्द्रसमन्विते। व्यये लग्ने धने पापे स्त्रीशापात्सुतक्षयः॥८५॥ पंचम भाव में शुक्र की राशि (२,७) राहु-चन्द्र से युक्त हो और १२, १, २ भावों में पापग्रह हों तो स्त्रीशाप से संतान का अभाव होता है॥८५॥ सप्तमे मन्दशुक्रौ च रन्ध्रेशे पुत्रभे रवौ। लग्ने राहुसमायोगे पत्नीशापात्सुतक्षयः॥८६॥ सातवें भाव में शनि-शुक्र हों, अष्टमेश पाँचवें भाव में हो, रवि राहु लग्न में हों तो स्त्रीशाप से संतान का अभाव होता है॥८६॥ धने कुजे व्यये जीवे पुत्रस्थे भृगुनन्दने। राहुयुक्तेक्षिते वापि पत्नीशापात्सुतक्षयः॥८७॥