भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

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३८४ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् अथ षष्टिहायनीदशाचक्रम्-

सू.गु.मं.चं.बु.शु.श.रा.ग्रहाः
१०१०१०वर्षाणि
श्र.रो.फा.स्वा.ज्ये.श्र.पू.भा.
भ.मृ.श्ले.उ.फा.वि.मू.ध.उ.भा.नक्षत्राणि
कृ.आ.म.ह.घ.पू.षा.श.रे.
पुन.चि.उ.षा.
इति षष्टिहायनी दशा।
अथ षट्त्रिंशतिकां दशामह-
श्रवणाज्जन्मभं यावद्गणयेदष्टभिर्भजेत्।
शशाङ्कार्कसुरेज्य secret/कार्कजौशुक्रराहवः ॥४१॥
श्रवण नक्षत्र से जन्मनक्षत्र तक गिनकर ८ से भाग देने से शेषतुल्य
क्रम से चन्द्र, सूर्य, गुरु, भौम, बुध, शनि, शुक्र, राहु की दशा होती
है॥४१॥
एकौपंचयतश्चैकाद्वर्षाण्येषां क्रमात्स्मृताः।
दिवसे सूर्यहोरायां रात्रौ वै चन्द्रहोरके ॥४२॥
और १ से एक अंक के वृद्धि तुल्य इनकी दशा का वर्ष होता है। दिन
में सूर्य की होरा में और रात में चन्द्र की होरा में जन्म हो तो यह दशा
लेनी चाहिए॥४२॥
अथ षट्त्रिंशदब्दिकां दशाचक्रम्-
चं.सू.बृ.मं.बु.श.शु.रा.ग्रहाः
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वर्षाणि
श्र.ध.श.पू.भा.उ.भा.रे.अ.भ.
कृ.रो.मृ.आ.पुन.पु.श्ले.म.नक्षत्राणि
पू.फा.उ.फा.ह.चि.स्वा.वि.अनु.ज्ये.
मू.पू.षा.उ.षा.+++++
इति षट्त्रिंशदब्दिका दशा।