बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ दशाध्यायः ४०१ अथ चरदशानयनम्- लग्नादि व्ययपर्यन्तं राशयो द्वादशो द्विज। आयुर्वर्षप्रदातार एभिश्चरदशा मता।।७।। लग्न से १२वें भाव पर्यन्त १२ राशियाँ होती हैं। ये आयु के वर्ष को देने वाली होती हैं और इन्हीं से चरदशा भी होती है।।७।। ओजर्क्षाणां क्रमाद्विप्र समानां व्युत्क्रमात्पुनः। नाथान्तेन समाज्ञेया निर्विशङ्कं द्विजोत्तम।।८।। ओज (विषम) राशियों का क्रम से और सम राशियों का व्युत्क्रम से उस राशि के स्वामी पर्यन्त गिनने से दशा के वर्ष का मान होता है।।८।। मेषो वृषोऽथ मिथुनो तुलालिश्च धनुर्धरः। एतेषामोजसंज्ञा स्यादब्दानां गणनाक्रमात्।।९।। मेष, वृष, मिथुन, तुला, वृश्चिक, धन राशियों की ओज संज्ञा है और इसमें वर्ष के गणना क्रम से गिनना चाहिए।।९।। कर्कः सिंहश्च कन्या च नक्रकुम्भझषा द्विज। एतेषां समसंज्ञा स्यादृक्षाणां व्युत्क्रमाद्द्विज।।१०।। कर्क, सिंह, कन्या, मकर, कुंभ और मीन इन राशियों की सम संज्ञा है। इनमें व्युत्क्रम गणना से वर्ष की संख्या को जानना चाहिए।।१०।। स्वर्क्षसंस्थितखेटस्य वर्षाणि द्वादशैव हि। धनस्थे चैकवर्षं हि तृतीये हायनद्वयम्।।११।। ग्रह (राशीश) अपनी राशि में हो तो १२ वर्ष की दशा होती है। अपनी राशि से धन भाव में हो तो १ वर्ष, तीसरे भाव में हो तो २ वर्ष।।११।। तुर्ये वर्षत्रयं विप्र पञ्चमे तुर्यहायनम्। रिपुस्थे पञ्चवर्षाणि षड्वर्षाणि च सप्तमे।।१२।। चौथे में हो तो ३ वर्ष, पाँचवें में हो तो ४ वर्ष, छठे में हो तो ५ वर्ष, सातवें में हो तो ६ वर्ष, आठवें में हो तो ७ वर्ष।।१२।। रन्ध्रस्थे नगवर्षाणि चाष्टवर्षाणि पुण्यभे। नभस्थे चाङ्कवर्षाणि दिग्वर्षाणि तु लाभगे। व्ययस्थे रुद्रवर्षाणि राश्यङ्काश्च तथानघ।।१३।।