भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 398, कुल 800 में से

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पृष्ठ 398

४०० बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् धन्वंश में बुद्धिमान्, मकरांश में पापी, कुम्भांश में व्यापारी और मीनांश में धान्य से युक्त होता है।।१००।। अथ देहजीवफलम्- देहजीवसमायोगे भौमार्करविजादिभिः। एकैकयोगे मरणं बहुयोगे तु का कथा।।१।। यदि देह या जीव में कोई भी भौम, सूर्य, शनि में से किसी से युत हो तो मरण होता है। यदि सभी से युक्त हो तो क्या कहना है।।१।। देहयोगे महाबाधा जीवयोगे तु मृत्युदः। द्वाभ्यां संयोगमात्रेण हन्यते नात्र संशयः।।२।। देह में पापग्रह का योग हो तो महाबाधा होती है और जीव में पापयोग हो तो मृत्यु होती है। यदि दोनों में पापयोग हो तो अवश्य मृत्यु होती है।।२।। देहे जीवे यदा राहुः सौरिर्वक्रो रविः स्थितः। मृत्युकालगतिं ज्ञात्वा शान्तिं कुर्याद्यथाविधि ।।३।। देह-जीव में जब राहु, शनि, भौम, सूर्य स्थित हों उस समय मृत्यु का भय होता है। इसे जानकर शान्ति करनी चाहिए।।३।। देहे जीवे यदि सोमे सौम्यजीवसितः स्थितः। तदा सौख्यं प्रकुर्वन्ति रोगमृत्युविनाशनम् ।।४।। देह-जीव में जब चन्द्रमा, बुध, गुरु, शुक्र होते हैं उस समय रोग तथा मृत्यु का नाश कर सुख देते हैं।।४।। पापक्षेत्रे दशायोगे देहजीवौ तु दुःखदौ। शुभक्षेत्रे दशायोगे शुभयोगे शुभं भवेत् ।।५।। देह-जीव पापक्षेत्र में हों और पापयुक्त हों तो उसकी दशा में दुःख होता है। देह-जीव शुभक्षेत्र में हों और शुभयुक्त हों तो उसकी दशा में शुभ फल होता है।।५।। देहे शुभग्रहैर्युक्ते भूषणादि ध्रुवं भवेत्। जीवे शुभग्रहैर्युक्ते पुत्रदारादिकाँल्लभेत ।।६।। देह में शुभग्रह युक्त हों तो भूषण आदि का लाभ होता है। जीव शुभग्रह से युक्त हो तो पुत्र-स्त्री आदि का लाभ होता है।।६।। इति कालचक्रदशाज्ञानम्।