बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ दशाध्यायः . ३९९ कन्या से कर्क में जाने के समय पूर्वभाग से लाभ और उत्तर देश की शुभकर यात्रा होती है।।९३।। सिंहात्तु मिथुने याते पूर्वभागं विसृज्यते। कार्यान्तेऽपि च नैर्ऋत्यां सुखं यात्रा भविष्यति ।।९४।। सिंह से मिथुन में जाने के समय पूर्व दिशा को त्याग देना चाहिए। कार्य हो जाने पर भी नैर्ऋत्य कोण की यात्रा से सुख होता है।।९४।। कर्कटात्तु गते सिंहे कार्यहानिश्च जायते। दक्षिणां दिशमाश्रित्य प्रत्यगामनं भवेत् ।।९५।। कर्क से सिंह में जाने के समय दक्षिण दिशा में यात्रा करने से कार्य की हानि होती है और दक्षिण से पश्चिम की यात्रा होती है।।९५।। मीनात्तु वृश्चिके याते उदग्गच्छति सङ्कटम्। चापाच्च मकरे विप्र दुःखं सङ्कटमुच्यते ।।९६।। मीन से वृश्चिक में जाने के समय उत्तर की यात्रा से संकट होता है। धन से मकर में जाने से दुःख और संकट होता है।।९६।। चापान्मेषे तु यात्रायां वधबन्धो मृतिर्भवेत्। तुला सम्पद्विवाहश्च स्त्रीप्राप्तिर्वृश्चिके गतिः ।।९७।। धन से मेष में जाने के समय वध, बंधन और मृत्यु होती है। तुला से वृश्चिक में जाने के समय सम्पत्ति, स्त्री की प्राप्ति होती है।।९७।। अथ कालचक्रांशफलम्- मेषांशे चोरको विन्द्याच्छ्रीमाञ्छुक्रांशके भवेत्। बुधांशे ज्ञानसम्पन्नश्चन्द्रे च नृपतिर्भवेत् ।।९८।। यदि कालचक्र की दशा में मेषांश में जन्म हो तो चोर होता है। वृषांश में लक्ष्मीवान्, मिथुनांश में ज्ञानी, कर्कांश में राजा।।९८।। सिंहांशे भूपतिः प्रोक्तः सौम्यांशे पण्डितो भवेत्। तुलांशे राजमन्त्री च भौमांशे निर्धनो भवेत् ।।९९।। सिंहाश में राजा, कन्यांश में पंडित, तुलांश में राजमन्त्री, [वृश्चिकां]श में दरिद्र।।९९।। चापांशे ज्ञानसंयुक्तो मकरांशे च पापकृत्। कुम्भांशे च वणिक्कर्मा मीनांशे किल धान्यवान् ।।१००।।