भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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पृष्ठ 396

३९८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् अथ कालचक्रगतिभेदमाह- प्रथमा गति मण्डूकी द्वितीया मर्कटी तथा। बाणाच्च नवपर्यन्तं गतिः सिंहावलोकनम् ।।८८।। कालचक्र की गति ३ प्रकार की होती है। पहली गति का नाम मण्डूकी है, दूसरी का नाम मर्कटी और तीसरी का नाम सिंहावलोकन है।।८८।। कन्यायां कर्कटे वापि सिंहभे मिथुनेऽपि च। माण्डूकी गति विज्ञेया भवेद्रोगस्य कारणम् ।।८९।। कन्या से कर्क में और सिंह से मिथुन में जाने को मण्डूकी गति कहते हैं। इसमें रोग होता है।।८९।। मीनवृश्चिकयोर्विप्र चापमेषस्तथैव च। सिंहावलोकनं चैव तादृशं च फलं भवेत्। सिंहावगतिमार्गे च मर्कटीगतिसम्भवः ।।९०।। मीन से वृश्चिक में और धन से मेष में जाने को सिंहावलोकन गति कहते हैं। नाम सदृश ही इसका फल होता है। सिंह से कर्क में जाने को मर्कटी गति कहते हैं।।९०।। गतिफलञ्चाह- मीनात्तु वृश्चिके याते ज्वरो भवति निश्चितम्। कन्यातः कर्कटे याते भ्रातृबन्धुविनाशनम् ।।९१।। मीन से वृश्चिक प्राप्त हो तो उस दशा में निश्चय ही ज्वर होता है। कन्या से कर्क प्राप्त हो तो उस दशा में माता और बन्धु का नाश होता है।।९१।। सिंहात्तु मिथुने याते स्त्रिया व्याधिर्भवेद् ध्रुवम्। कर्कटाच्च हरौ याते वधो भवति देहिनाम्। पितृबन्धुमृतिं विद्याच्चापान्मेषगते पुनः ।।९२।। सिंह से मिथुन प्राप्त हो तो इस दशा में स्त्री को रोग होता है। कर्क से सिंह प्राप्त हो तो उस दशा में मनुष्य का वध होता है। धन से मेष प्राप्त हो तो पिता के भाई (चाचा) की मृत्यु होती है।।९२।। पुनः गतिफलमाह- कन्यातः कर्कटे याते पूर्वभागे महत्फलम्। उत्तरे देशमाश्रित्य शुभा यात्रा भविष्यति ।।९३।।