बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४१२ वृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् उदाहरण— पूर्वोक्त जन्मकुंडली में लग्न और सप्तम में बली लग्न सम राशि की है; अतः उत्क्रम से ९,१२,३,६,१०,१,४,७,११,२,८,५ इन राशियों की दशा होगी। शेष चक्र में स्पष्ट है। मण्डूकदशाचक्रम्—
| ३ध. | मी. | मि. | क. | म. | मे. | कं. | तु. | कुं. | वृ. | सिं. | वृ. |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ९ | ९ | ९ | ९ | ७ | ७ | ७ | ७ | ८ | ८ | ८ | ८ |
| २०१३ | २२ | ३१ | ४० | ४९ | ५६ | ६३ | ७० | ७७ | ८५ | ९३ | २००१<br>२००९ |
| ३<br>१८ | ३<br>१८ |
इति मण्डूकदशा। अथ शूलदशामाह— दशाशूलं प्रवक्तव्यं फलनिर्याणराशितः। प्रवक्ति सप्तमाद्विप्र निर्देशे शूलमात्रतः।।५८।। निर्याण की राशि से शूलदशा का फल कहना चाहिए। वह सप्तम से शूल का विचार करना चाहिए।।५८।। माहेश्वरर्क्षादि दशा निर्याणस्थानशूलभम्। बलेन शूलसंग्राह्या मृत्युरस्य द्विजोत्तम।।५९।। माहेश्वर ग्रह की राशि से निर्याण राशि को शूल राशि कहते हैं।।५९।। दशानेकविधा विप्र सप्ताष्टनवभिः समाः। अत्र ग्राह्या महाप्राज्ञ शूले निर्याणनिश्चितम्।।६०।। लग्न और सप्तम से आठवीं राशि को निर्याण राशि कहते हैं। इसमें दशा वर्ष (स्थिर दशा के समान ही) ७, ८, ९ वर्ष की होती है।।६०।। लग्नसप्तमयोर्विप्र क्रमोत्क्रमगणनया। तयोस्तु रन्ध्रभं विप्र शूलराशिश्च निश्चितम्।।६१।। लग्न और सप्तम से क्रम और उत्क्रम (विषम-सम) के अनुसार आठवीं राशियों में जो बली हो वही शूल वा निर्याण राशि होती है।।६१।। रन्ध्रेशयोर्बली विप्र रुद्रसंज्ञो भवेत्किल। रुद्रशूलान्तमायुः स्यादिति पूर्वैश्च भाषितम्।।६२।।