बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ दशाध्यायः ४१३ दोनों के स्वामियों में जो बली होता है वही रुद्रग्रह होता है। रुद्रशूलान्त ही आयु होती है।।६२।। उदाहरण- जन्मांग में लग्न से अष्टम सिंह राशि में बुध-गुरु हैं और सप्तम से अष्टम में कुम्भ राशि है उसमें मंगल है, अतः दोनों में बली सिंह राशि से क्रम गणना के अनुसार ही शूलदशा होगी। शूलदशाचक्रम्-
| सिं. | कं. | तु. | वृ. | ध. | म. | कुं. | मी. | मे. | वृ. | मि. | क. |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ८ | ९ | ७ | ८ | ९ | ७ | ८ | ९ | ७ | ८ | ९ | ७ |
| २०१३ | २१ | ३० | ३७ | ४५ | ५४ | ६१ | ६९ | ७८ | ८५ | ९३ | २१०२<br>२१०९ |
| ३<br>१८ | ३<br>१८ |
इति शूलदशा। अथ योगार्धदशामाह- चरस्थिरदशायाश्च योगं विप्र समाचरेत्। तस्यार्धञ्च समा विप्र योगार्धाख्या तु सा दशा ।।६३।। चरदशा और स्थिरदशा की राशियों के दशावर्ष के योग के आधे तुल्य योगार्ध दशा में राशियों का दशावर्ष होता है।।६३।। लग्नसप्तमयोर्मध्ये चिन्तयेत्तु बलाधिकम्। लग्ने बलयुते लग्नाद्दशारम्भं प्रकाशयेत् ।।६४।। लग्न और सप्तम में जो राशि बलवान् हो उसी से दशा का प्रारम्भ होता है।।६४।। तस्मात्सप्तमवीर्याढ्ये दशारम्भं प्रकल्पयेत्। बली लग्नास्तयोर्विप्र ओजसमक्रमेण वै। क्रमव्युत्क्रममार्गेण दशा लेख्या द्विजोत्तम ।।६५।। लग्न सप्तम में बली राशि विषम हो तो क्रम से, समराशि हो तो उत्क्रम से गणना होती है।।६५।। उदाहरण- जैसे कुंडली में लग्न राशि बली है और सम राशि है, अतः जन्मलग्न से उत्क्रम गणना से दशा का आरम्भ होगा। जन्मलग्न