भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 415, कुल 800 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 415

अथ दशाध्यायः । ४१७ लग्न से त्रिकोण ५।९ की राशियों में अर्थात् लग्न, पंचम और नवम राशियों में जो बलवान् राशि हो वहीं से चरपर्याय के समान ही दशा का आरम्भ होता है।।८२।। क्रमोत्क्रमेण गणयेदोजयुग्मेषु राशिषु । चर्यायरीत्या च समाकल्पया द्विजोत्तम ।।८३।। ओज राशि में क्रम से और सम राशि में उत्क्रम से चरपर्याय के समान ही दशा का वर्ष भी होता है।।८३।। उदाहरण-जन्म कुण्डली में मकर लग्न से त्रिकोण में वृष और कन्या राशि में लग्न की राशि बली है अतः वहीं से आरम्भ कर समराशि होने के कारण उत्क्रम से त्रिकोण राशियों कन्या और वृष की दशा होगी फिर कुम्भ, तुला, मिथुन की इसके बाद मीन, वृश्चिक, कर्क की, फिर मेष, धन सिंह की दशा होगी, इनका दशा वर्ष चरदशा के समान ही होगा। त्रिकोणदशाचक्र-

म.क.वृ.कुं.तु.मि.मी.वृ.कं.मे.ध.सिं.
१११०१०११
२०१५१७२८२९३२३६३८४५५४६४७४८२२०९३
१८१८

इति त्रिकोणदशा। अथनक्षत्रदशा- जन्मादौ चन्द्रनक्षत्रे सर्वथा घटिकौघके । भानुना दीयते भागं शेषनाडी प्रकल्पयेत् ।।८४।। जन्म समय जन्मनक्षत्र के भभोग घटी में १२ से भाग देने से जो घट्यादि फल आवे।।८४।। प्रथमं खंडमारम्य द्वादशे खंडके द्विज । लग्नाद्द्वादशराशीनां गणनीयं क्रमेण च ।।८५।। उस खंड से आरम्भ कर १२ खंडों का लग्न से १२ राशियों की दशा होती है।।८५।। या घटी कर्मवत्खंडे जन्मखंडश्च आदितः । आरभ्य गणनायां च जन्मलग्नादितो द्विज ।।८६।।