भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 436, कुल 800 में से

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पृष्ठ 436

४३८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । अन्नदाने महत्सौख्यं नित्यं मिष्ठान्नभोजनम् । उत्साहः कीर्त्तिसम्पत्ती स्त्रीपुत्रधनसंपदः ।।७५।। अन्नदान, सुख, नित्य मिष्ठान्न का भोजन, उत्साह, कीर्त्ति में वृद्धि, संपत्ति, स्त्री, पुत्र धन का लाभ होता है।।७५।। स्वभुक्तौ फलमेवं स्याद्वलान्यानि भुक्तिषु । द्वितीयद्यूननाथेतु देहपीडा भविष्यति ।।७६।। इसी प्रकार अपने अन्तर में भी फल को देता है। शुक्र दूसरे, सातवें भाव का स्वामी हो तो शरीर में पीड़ा होती है।।७६।। तद्दोष परिहारार्थं रुद्रं वा त्र्यम्बकं जपेत् । श्वेतां गां महिषष्टीं दद्यादारोग्यं च भविष्यति ।।७७।। इस दोष के शान्त्यर्थ रुद्राभिषेक वा त्र्यम्बक मन्त्र का जप कराने से रोगादि निवृत्त हो जाते हैं।।७७।। लग्नेशस्य दशा वलं वहुधनं वित्तेशितुः पंचतां कष्टं वेति सहोदरालयपतेः पापंफलं प्रावशः । तुर्यस्वामिनि आलयं किल सुताधीशस्य विद्यासुखं- रोगागारपतेररातिजभयं जायापतेः शोकत्ताम् ।।७८।। लग्नेश की दशा में बल पौरुष की वृद्धि, धन का लाभ होता है, धनेश की दशा में मृत्यु अथवा कष्ट, तृतीयेश की दशा में प्रायः कष्ट ही होता है। सुखेश की दशा में गृह सुख, सुतेश की दशा में विद्या का लाभ। षष्ठेश की दशा में शत्रु भय, सप्तमेश की दशा में शोक।।७८।। मृत्युं मृत्यूपतेः करोति नियतं धर्मेशितुः सत्क्रियाम्- वित्तं राजपतेर्मुपाश्रयमथोलाभं हिलाभेशितुः । रोगं द्रव्यविनाशनं च वहुधा कष्टं व्ययेशस्य वै-पूर्वैर्ऋङ्गभृतामुदीरितमिदं तन्वादिभावेशजम् ।।७९।।। अष्टमेश की दशा में राजा के आश्रय से धन का लाभ, लाभेश की दशा में लाभ और व्ययेश की दशा में रोग द्रव्य की हानि और अनेक कष्ट होते हैं।।७९।। भावाधिपो बलयुतो निजगेहंगामी तुङ्गत्रिकोण शुभवर्गगतोऽपिपूर्णम् ।

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