बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ दशाफलाध्यायः । ४४१ होता है और पशु की हानि होती है। यदि भौम हो तो प्रमाद से घर जल जाता है।।९४।। शनौ हृदयशूलत्वं स्यात्सूर्ये राजप्रकोपनम् । सर्वस्वहरणं राहौ विषचौरादिजंभयम् ।।९५।। चौथे शनि हो तो हृदय में शूल होता है। सूर्य हो तो राजा के कोप से सर्वस्व नाश और राहु हो तो विष तथा चोर से भय होता है।।९५।। यस्माद्दशमभे राहुः पुण्यतीर्थाटनं भवेत् । यस्मात्कर्मार्थभाग्यर्क्षगताः शोभनखेचराः ।।९६।। जिससे १० वें स्थान में राहु हो तो उसकी दशा में पुण्यतीर्थों का भ्रमण होता है। जिससे १०, ११, ९ स्थान में शुभ ग्रह गये हों उसकी दशा में।।९६।। विद्यार्थधर्मसत्कर्मख्यातिपौरुषसिद्धयः । यतः पंचमकामारिगताः स्वोच्चे शुभग्रहाः ।।९७।। विद्या, धन, धर्म और सत्कर्म तथा पुरुषार्थ की सिद्धि होती है जिससे ५।७।६ स्थान में अपने उच्चराशि में शुभग्रह गये हों।।९७।। पुत्रदारादि संप्राप्तिर्नृपपूजा महत्तरा । यस्मिन्विद्यायकर्माम्बुनवलग्नाधिपाः स्थिताः ।।९८।। तो उसकी दशा में पुत्र, स्त्री आदि का लाभ और राज्य से पूजित होता है।।९८।। तत्तद्भावार्थसिद्धिः स्याच्छ्रेयो योगानुसारतः । यस्मिन् गुरुर्वा शुक्रो वा शुभेशो वापिसंस्थितः ।।९९।। जिन-जिन भावों में ५।११।१०।४।९ और लग्न के स्वामी बैठे हों। उन- उन भावों के फल में पुष्टता होती है तथा योगानुसार विशेष फल भी होता है।।९९।। कल्याणोत्सवसम्पत्तिर्देवब्राह्मणपूजनम् । यच्चतुर्थे तुङ्गखेटाः शुभस्वामी ग्रहश्च वा ।।१००।। जिस भाव में गुरु वा शुक्र वा ९ भावं के स्वामी बैठे हों तो उसकी दशा में कल्याण, उत्सव, सम्पत्ति, देवता और ब्राह्मण का पूजन होता है। जिससे चौथे भाव में कोई उच्चराशि का ग्रह हो वा शुभ ग्रह हो तो उसकी दशा में।।१००।। वाहनग्रामलाभश्च पशुवृद्धिश्च भूयसी । तत्र चन्द्रेष्टलाभः स्याद्बहुधान्यरसान्युतः ।।१०१।।