बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४४६ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । इष्टानिष्टस्थानभेदात् फलभेदात्समुन्नयेत् । एवं सर्वग्रहाणां च स्वां स्वामन्तर्दशामपि ॥१२७॥ अन्तरदशा काल में अशुभ स्थान भेद से सभी ग्रहों के अन्तर्दशा का शुभ पापफल का विचार करना चाहिये ।। १२७।। स्वराशितो राशिभुक्तिं प्रकल्प्य फलमीरयेत् । अन्तरन्तर्दशां स्वीयां विभज्यैवं पुनः पुनः ।।१२८।। एवं राशि से राशि की अन्तर्दशा की कल्पना कर फल कहना चाहिये तथा अन्तर्दशा में पुनः अन्तर्दशा कल्पना कर उससे भी सूक्ष्म फल कहना चाहिये ।। १२८ ।। गुर्जरे कच्छ सौराष्ट्रे पांचाले सिन्धुपर्वते । एते अष्टोत्तरी श्रेष्ठा अन्ये विंशोत्तरी मता ।। १२९ ।। गुजरात, कच्छ, सौराष्ट्र, पांचाल, सिन्धु, पर्वत में अष्टोत्तरी दशा लेनी चाहिये और अन्यत्र विंशोत्तरी दशा लेनी चाहिये ।। १२९ ।। इति बृहत्पाराशर होरायां पूर्वार्धे दशाफल कथनाध्यायः । अथान्तर्दशादिफलविचाराध्यायः । तत्रादौ अन्तर्दशाऽऽनयनप्रकारमाह- दशादशाहता कार्या दशभिर्भागमाहरेत् । लब्धं मासास्तथा शेषं त्रिंशघ्नं च दिनानिच ।।१।। जिस ग्रह की दशा में जिस ग्रह का अन्तर निकालना हो उसके दशा वर्ष को दशेश के वर्ष से गुणाकर गुणनफल में १० का भाग देने से लब्धि मास और शेष को ३०. से गुणा कर १० से भाग देने से लब्ध दिन होता है ।। १ ।। उदाहरण-जैसे सूर्य के दशा में सूर्य का अन्तर निकालना है तो सूर्य के दशा वर्ष संख्या ६ को ६ से गुणने से ३६ हुआ इसमें १० का भाग देने से लब्धि ३ मास शेष ६ को ३० से गुणा कर १० का भाग देने से १८ दिन आया। अर्थात् सूर्य की दशा में ३ मास १८ दिन सूर्य का ही अन्तर रहेगा। इसी प्रकार चन्द्रमा के दशा वर्ष १० से सूर्य के दशा वर्ष का गुणा कर १० का भाग देने से लब्धि ६ मास चन्द्रमा का अन्तर हुआ ।।