बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४४८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । शुक्रदशावर्ष २० अन्तर्दशा | शु. | सू. | चं. | मं. | रा. | बृ. | श. | बु. | के. | ग्र. | | ३ | १ | १ | १ | ३ | २ | ३ | २ | १ | व. | | ४ | ० | ८ | २ | ० | ८ | २ | १० | २ | मा. | | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | दि. | फलमाह- स्वद्वादशांशके लग्न नाथे वा स्वदृक्काणगे । तस्य भुक्तिं शुभामाहुर्मुनयः कालचिंतकाः ।।२।। अपने द्वादशांश में लग्नेश हो अथवा अपने द्रेष्काण में हो तो उसका अन्तर शुभद होता है ऐसा दैवज्ञ कहते हैं।।२।। स्वत्रिंशांशेऽथवा मित्र त्रिंशाशकेऽपिवा । तस्य भुक्तिः शुभाः प्रोक्ताकालविद्भिर्मनीषिभेः।।३।। अपने त्रिंशांश में अथवा मित्र के त्रिंशांश में ग्रह हो तो उसका अन्तर भी शुभद होता है।।३।। मित्रक्षेत्रे नवांशस्थे मित्रस्य द्वादशांशके । तस्यभुक्तिः शुभाप्रोक्ता कालविद्भिर्मनीषिभिः ।।४।। मित्र की राशि में अथवा नवांश में वा द्वादशांश में ग्रह हो तो उसका अन्तर धी शुभद होता है।।४।। बुद्धिक्षेत्रनवांशस्थे पुत्रस्य द्वादशांशके । मित्रद्रेष्काणगेवापि तस्यभुक्तिः शुभावहा ।।५।। पंचम भाव के नवांश में वा पंचम भाव के द्वादशांश में वा मित्र के द्रेष्काण में हो तो उसका अन्तर भी शुभद होता है।।५।। तयोः राशिनवांशस्थे धर्मस्य द्विरसांशके । गुरु द्रेष्काणमे वापि तस्य भुक्तिः शुभावहा ।।६।। नवम भाव की राशि या नवांश में वा नवम भाव के द्वादशांश में ग्रह हो अथवा गुरु के द्रेष्काण में हो तो उसका अन्तर शुभद होता है।।६।। सुखराशिनवांशस्थे बाहनद्विरसांशके । सुखद्रेष्काणगे वापि तस्यभुक्तिः शुभावहा ।।७।। सुख भाव की राशि वा नवांश में वा द्वादशांश का सुख भाव के द्रेष्काण में हो तो उसका अन्तर शुभद होता है।।७।।