भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 453, कुल 800 में से

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पृष्ठ 453

अथान्तर्दशादिफलविचाराध्यायः । ४५५ इसकी शांति के लिये दुर्गापाठ, बकरी, काली गौ, भैंस का दान करना चाहिये इससे आराम होता है।।४८।। रविदशायांगुर्वन्तर्दशाफलम् - सूर्यस्यान्तर्गते जीवे लग्नात्केन्द्रत्रिकोणगे । स्वोच्चमित्रस्य वर्गस्थे विवाहं राजदर्शनम् ।।४९।। सूर्य की दशा में अपने उच्च वा अपने मित्र के वर्ग में स्थित केन्द्र वा त्रिकोण में रहने वाले गुरु के अंतर में विवाह राजा का दर्शन।।४९।। धनधान्यादिलाभं च पुत्रलाभं महत्सुखम् । महाराजप्रसादेन इष्टकामार्थलाभकृत् ।।५०।। धन; धान्य का लाभ, पुत्र सुख, बड़ा सुख, राजा की प्रसन्नता से इष्ट कार्य, धन का लाभ।।५०।। ब्राह्मणप्रियसन्मानं प्रियवस्त्रादिलाभकृत् । भाग्यकर्माधिपवशाद्राज्यलाभं महोत्सवम् ।।५१।। ब्राह्मण और मित्रों से सम्मान, प्रियवस्त्रादि का लाभ होता है। भाग्येश और कर्मेश हो तो राज्य का लाभ, बड़ा उत्सव।।५१।। नरवाहनयोगश्च स्थानाधिक्यं महत्सुखम् । दायेशाच्छुभराशिस्थे भाग्यवृद्धिः सुखावहा ।।५२।। मनुष्य की सवारी (पालकी) स्थान लाभ, सुख होता है। दशेश से शुभ राशि में हो तो भाग्यवृद्धि, सुख। दानधर्मक्रियायुक्तो देवताराधनप्रियः । गुरुभक्तिः मनः सिद्धिःपुण्यकर्मादिसंग्रहः ।।५३।। दान आदि धार्मिक क्रिया में प्रवृत्त देवता का आराधन, गुरु की भक्ति और पुण्य कर्मों का संग्रह होता है।।५३।। दायेशाद्रिपुरन्ध्रस्थे नीचे वा पापसंयुते । दारपुत्रादिपीडाच देहपीडा महद्भयम् ।।५४।। दशेश से ६।८ स्थान में अपने नीचराशि में पापग्रह से युत हो तो स्त्री पुत्र आदि को पीड़ा, शरीर में पीड़ा, बड़ा भय।।५४।। राजकोपं प्रकुरुते इष्टवस्तुविनाशनम् । पापमूलाद्द्रव्यनाशं देहभ्रष्टं मनोरुजम् ।।५५।।