भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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५० बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् सप्तमांश चक्र-

पतयः१०१११२
क्षार१ मं.८ मं.३ बु१० श.५ सू.१२ बृ.७ शु.२ शु.९ बृ.४ चं.११ श.६ बु.
क्षीर२ शु.९ बृ.४ चं.११ श.६ बु.१ मं.८ मं.३ बु.१० श.५ सू.१२ बृ.७ शु.
दधि३ बु.१० श.५ सू.१२ बृ.७ शु.२ शु.९ बृ.४ चं.११ श.६ बु.१ मं.८ मं.
आज्य४ चं.११ शु.६ बु.१ मं.८ मं.३ बु.१० श.३ बु.१२ बृ.७ शु.२ शु.९ बृ.
इक्षु-रस५ सू.१२ बृ.७ शु.२ शु.९ बृ.४ चं.११ श.६ बु.१ मं.८ मं.३ बु.१० श.
मद्य६ बु.१ मं.८ मं.३ बु.१० श.५ सू.१२ बृ.७ शु.२ शु.९ बृ.४ चं.११ श.
शुद्ध जल७ शु.२ शु.९ बृ.४ चं.११ श.६ बु.१ मं.८ मं.३ मं.१० श.५ सू.७ शु.
नवमांशाधिपतिमाह-
नवांशाश्चरे तस्मात्स्थिरे तन्नवमादितः।
उभये तत्पञ्चमादेरिति चिन्त्यं विचक्षणैः।
देवानृराक्षसाश्चैव चरादिषु गृहेषु च॥१९१॥
एक राशि में ३ अंश २० कला के नव नवमांश होते हैं। चर राशि में
उसी राशि से, स्थिर राशि में उससे नवम राशि से और द्विस्वभाव राशि में
उससे पाँचवीं राशि से नव राशि तक प्रत्येक राशि ३ अंश २० कला
के तुल्य होती हैं। क्रम से देवता, नर और राक्षस अंशेश होते हैं॥१९१॥
उदाहरण- लग्न ९।१५।२२।३७ में ३ अंश २० कला के हिसाब से
पाँचवाँ नवमांश वृष राशि का हुआ। इसके स्वामी शुक्र और नर अंशेश
हुए।