बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथान्तर्दशादिफलविचाराध्यायः । ५०३
गुरु की दशा में लग्न से केन्द्र वा त्रिकोण वा अपने उच्च वा अपनी राशि वा उच्चांश वा अपने नवांश में गये हुये भौम के अन्तर में ।।६४।। विद्याविवाहकार्याणि ग्रामभूम्यादिलाभकृत् । जनसामर्थ्यमाप्नोति सर्वकार्यार्थसिद्धिदम् ।।६५।। विद्या, विवाह आदि कार्य, ग्राम भूमि आदि की प्राप्ति, लोगों से सम्पर्क और सभी कार्य की सफलता और धन का लाभ होता है ।।६५।। दायेशात्केन्द्रकोणेवा लाभे वा धनगेऽपिवा । शुभयुक्ते शुभैर्दृष्टे धनधान्यादिसम्पदम् ।।६६।। दशेश से केन्द्र कोण में वा लाभ स्थान वा धन स्थान में शुभग्रह से युक्त शुभग्रह से दृष्ट हो तो धन धान्य आदि सम्पत्ति का लाभ ।।६६।। मिष्ठान्नदानविभवं राजप्रीतिकरं शुभम् । स्त्रीसौख्यं च सुतावाप्तिः पुण्यतीर्थफलप्रदम् ।।६७।। मिष्ठान्न का दान, वैभव का लाभ, राजा से प्रेम, स्त्री को सुख, पुत्र का लाभ और पुण्यतीर्थ का लाभ होता है ।।६७।। दायेशात्षष्ठरंध्रे वा व्ययेवा नीचगेऽपिवा । पापयुक्तेक्षिते वापि धान्यार्थगृहनाशनम् ।।६८।। दशेश से ६।८।१२ भाव में वा नीच राशि में पापग्रह से युत दृष्ट हो तो धन धान्य गृह नाश ।।६८।। नानारोगभय दुःखं नेत्ररोगादिसम्भवम् । पूर्वार्धे क्लेशमधिकमपरार्धे महत्सुखम् ।।६९।। अनेक रोगों का भय, दुःख, नेत्ररोग की सम्भावना होती है। अन्तर के पूर्वार्ध में अधिक कष्ट और उत्तरार्ध में बड़ा सुख होता है ।।६९।। द्वितीयद्यूननाथेतु देहजाड्यं मनोरुजम् । अनड्वाहं प्रकुर्वीत सर्वसम्पत्प्रदायकम् ।।७०।। २ वा ७ भाव का स्वामी हो तो देह में जड़ता होती है और मन में विकार होता है। वृष का दान करने से सभी सम्पत्तियों का लाभ होता है ।।७०।। अथगुरुदशायांराह्वन्तर्दशाफलम् - जीवस्यान्तर्गते राहौ स्वोच्चे वा केन्द्रगेऽपिवा । मूलत्रिकोणभाग्ये च केन्द्राधिपसमन्विते ।।७१।।