भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 504, कुल 800 में से

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पृष्ठ 504

५०६ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । और अन्त में शुभफल, ग्राम, भूमि, आदि का लाभ होता है। २ वा ७ भाव का स्वामी हो तो अपमृत्यु का भय होता है इस दोष की शान्ति के लिये मृत्युंजय का जप करना चाहिये।।६।। अथशनिदशायांबुधान्तर्दशाफलम्- मन्दस्यान्तर्गते सौम्ये त्रिकोणे केन्द्रगेऽपिवा । सन्मानं च यशः कीर्त्तिर्विद्यालाभं धनागमम् ।।७।। शनि की दशा में त्रिकोण वा केन्द्र में गये हुये बुध के अन्तर में सम्मान, यश, कीर्ति, विद्या और धन का लाभ होता है।।७।। स्वदेशे सुखमाप्नोति वाहनादिफलैर्युतम् । यज्ञादिकर्मसिद्धिश्च राजयोगादिसम्भवम् ।।८।। अपने देश में सुख का लाभ वाहन आदि से युक्त होता है। यश आदि कर्मों की सिद्धि, राजयोग की सम्भावना।।८।। देहसौख्यं हृदुत्साहं गृहे कल्याण सम्भवम् । सेतुस्नानफलावाप्तिः तीर्थयात्रादिकर्मणा ।।९।। देह में सुख, हृदय में उत्साह, गृह में कल्याण, समुद्रस्नान और पुण्यतीर्थ की यात्रा का अवसर प्राप्त होता है।।९।। वाणिज्याद्धनलाभश्च पुराणश्रवणादिकम् । अन्नदानफलं चैव नित्यं मिष्टान्न भोजनम् ।।१०।। व्यापार से धन का लाभ और पुराण आदि का श्रवण, अन्नदान का फल और नित्यमिष्ठान्न भोजन होता है।।१०।। षष्ठाष्टमव्यये सौम्ये नौचे वास्तंगतेसति । रव्यारफणिसंयुक्ते दायेशाद्द्वातथैव च ।।११।। यदि बुध ६।८।१२ भाव में वा नीच राशि में वा अस्त हो और बुध ६।८।१२ भाव में नीच राशि में वा अस्त हो और रवि, भौम राहु से युक्त हो इसी प्रकार दशेश से भी स्थित हो तो अपने अन्तर में।।११।। नृपाभिषेकमर्थाप्तिदेशग्रामाधिपत्यता । फलमीदृशमादौ तु मध्यान्ते रोगपीडनम् ।।१२।। राज्याभिषेक, धन का लाभ और देश वा ग्राम का आधिपत्य होता है। ऐसा

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