भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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पृष्ठ 506

. ५०८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । ६।८।१२ भाव में केतु हो इसी प्रकार दशेश से भी इन्हीं भावों में हो तो।।१९।। अपमृत्युभयं चैव कुत्सितान्नस्य भोजनम् । शीतज्वरातिसारश्च व्रणचौरादिपीडनम् ।।२०।। अपमृत्यु का भय खराब अन्न का भोजन, शीतज्वर, अतिसार, व्रण, चौर आदि से कष्ट होता है।।२०।। दारपुत्रवियोगश्च संसारे भवति ध्रुवम् । द्वितीयद्यूनराशिस्थे देहपीडा भविष्यति । छागदानं प्रकुर्वीत ह्यपमृत्युभयं हरेत् ।।२१।। स्त्री-पुत्र आदि से वियोग निश्चयरूप से होता है। यदि २ वा ७ भाव में हो तो शरीर में पीड़ा होती है इसके शान्त्यर्थ बकरी का दान करना चाहिये जिससे अपमृत्यु का भय नहीं होता है।।२१।। अथशनिदशायांशुक्रान्तर्दशाफलम् - मन्दस्यान्तर्गते शुक्रे स्वोच्चे स्वक्षेत्रगेऽपिवा । केन्द्रे वा शुभसंयुक्ते त्रिकोणे लाभगेऽपिवा ।।२२।। शनि की दशा में अपने उच्च वा राशि में वा केन्द्र में वा शुभयुक्त वा त्रिकोण वा लाभ स्थान में गये हुये शुक्र के अन्तर में।।२२।। दारपुत्रधनप्राप्तिर्देहारोग्यं महोत्सवः । गृहे कल्याणसम्पत्ती राज्यलाभं महत्सुखम् ।।२३।। स्त्री-पुत्र-धन का लाभ, देह में आरोग्यता, बड़ा उत्सव, गृह में कल्याण, धन-धान्य सम्पत्ति का लाभ, राज्य का लाभ और बड़ा सुख।।२३।। महाराजप्रसादेन इष्टसिद्धिः सुखावहा । सन्मानः आत्मसन्तोषः प्रियवस्त्रादिलाभकृत् ।।२४।। और महाराज की प्रसन्नता से सुखकर इष्टसिद्धि, सम्मान, आत्मसंतोष, प्रियवस्त्रों का लाभ।।२४।। द्वीपान्तराद्वस्त्रलाभः श्वेताश्वो महिषी तथा । गुरुचारवशाद्भाग्यं सौख्यं च धनसम्पदः ।।२५।। द्वीपान्तर (परदेश) से वस्त्र का लाभ, सफेद घोड़ा, भैंस का लाभ होता है। गुरु के संचार से भाग्य, सुख और धन सम्पत्ति का लाभ होता है।।२५।।