भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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पृष्ठ 518

५२० बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । चोर, अग्नि, शस्त्र से पीड़ा और अधिक पित्त होता है। शिर में रोग, मनमें संताप, इष्ट बंधु का वियोग होता है।।२३।। द्वितीयसप्तमाधीशे ह्यपमृत्युर्भविष्यति । तद्दोषपरिहारार्थं शान्तिं कुर्याद्यथाविधि । सूर्यप्रीतिकरीं चैव दद्याद्धेनुं हिरण्यकम् ।।२४।। २।७ भाव का स्वामी हो तो अपमृत्यु का भय होता है! इसके शान्त्यर्थ यथाविधि सूर्य के प्रसन्न करने वाली शान्ति करनी चाहिये और गौ तथा सुवर्ण का दान करना चाहिये।।२४।। अथ बुधदशायांचन्द्रान्तर्दशाफलम् - सौम्यस्यान्तर्गते चन्द्रे लग्नात्केन्द्रत्रिकोणगे । स्वोच्चे वा स्वक्ष्मे वापि गुरुदृष्टिसमन्विते ।।२५।। बुध की महादशा में लग्न-से केन्द्र वा त्रिकोण में अपने उच्च में वा अपनी राशि में गुरु से देखे जाते हुये।।२५।। योगस्थानाधिपत्येन योगप्राबल्यमादिशेत् । स्त्रीलाभं पुत्रलाभं च वस्त्रवाहनभूषणम् ।।२६।। योगस्थान के अधिपति होने से योग प्रबल होता है, ऐसे चन्द्रमा के अन्तर में स्त्री का लाभ, पुत्र का लाभ और वस्त्र, वाहन, आभूषण का लाभ।।२६।। नूतनालयलाभं च नित्यं मिष्टान्नभोजनम् । गीतवाद्यप्रसंगश्च शास्त्रविद्याप्रशंसनम् ।।२७।। नूतन गृह का लाभ नित्य मिष्टान्न का भोजन होता है। गाना-बाजा का सुख, शास्त्र विद्या की प्रशंसा।।२७।। दक्षिणांदिशमाश्रित्य प्रयाणं च भविष्यति । द्विपान्तरादि वस्त्राणां लाभश्चैवभविष्यति ।।२८।। दक्षिण दिशा की यात्रा, द्वीपान्तर के वस्त्रों का लाभ।।२८।। मुक्ताविद्रुमरत्नानि धौतवस्त्रादिलाभदम् । नीचारिक्षेत्रसंयुक्ते देहबाधा भविष्यति ।।२९।। मुक्ता, मूङ्गा का लाभ और धौत वस्त्र का लाभ होता है। अपने नीच वा शत्रु की राशि में स्थित हो तो शरीर में बाधा होती है।।२९।।