बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५२६ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । षष्ठाष्टमव्यये मन्दे दायेशाद्वा तथैव च । अरातिदुःखबाहुल्यं दारपुत्रादिपीडनम् ।।६४।। ६।८।१२ भाव में शनि हो दशेश से भी इन्हीं स्थानों में हो तो शत्रु... अधिक दुःख, स्त्री पुत्र आदि को पीड़ा।।६४।। बुद्धिभ्रंशं बंधुनाशं कर्मनाशं मनोरूजम् । विदेशगमनंचैवदुःस्वप्नस्यप्रदर्शनम् ।।६५।। बुद्धि का नाश, बंधु का नाश, कर्म का नाश, मन में दुःख, विदेश यात्रा, दुःस्वप्नों का दर्शन होता है।।६५।। द्वितीयद्यूननाथे तु ह्यपमृत्युर्भविष्यति । तद्दोषपरिहारार्थं मृत्युंजय जपं चरेत् । कृष्णां गां महिषीं दद्यादायुरारोग्यवृद्धिनम् ।।६६।। २ वा ७ भाव का स्वामी हो तो अपमृत्यु का भय होता है। इस दोष की शान्ति के लिये काली गौ और भैंस का दान आयु आरोग्यता की वृद्धि के लिये देना चाहिये।।६६।। इति बुधदशायामन्तर्दशाफलम्। अथ केतुदशायांकेत्वन्तर्दशाफलम्- केन्द्रे त्रिकोणलाभे वा लग्नाधिपसमन्विते । भाग्यकर्मेशसम्बन्धे वाहनेशसमन्विते ।।१।। केतु की दशा में केन्द्र वा त्रिकोण वा लाभ स्थान में लग्नेश से युत वा भाग्येश कर्मेश से अच्छे सम्बन्ध से युक्त वाहनेश से युत केतु के अन्तर में।।१।। तद्भुक्तौ धनधान्यादि चतुष्पाज्जीवलाभकृत् । पुत्रदारादिसौख्यं च राजप्रीति मनोरूजः ।।२।। धन धान्य से युक्त चतुष्पद जीव का लाभ, पुत्र स्त्री का सुख, राजा से प्रेम मानसिक कष्ट।।२।। ग्रामभूम्यादिलाभश्च गृहं गोधनसंकुलम् । नीच ऽखेटसंयुक्ते ह्राष्टमे व्ययगेऽपिवा ।।३।। ग्राम भूमि आदि का लाभ और घर गोधन से परिपूर्ण होता है। नीच बा अस्त में गये हुये ग्रह से युक्त हो वा आठवें वा बारहें भाव में हो तो ।।३।। हृद्रोगं मानहानिं च धनधान्यपशुक्षयम् । दारपुत्रादिपीडां च मनश्चांचल्यमेव च ।।४।।