बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५५८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । बुध के अन्तर में गुरु के प्रत्यंतर में राज्य वा राज्याधिकारी की प्राप्ति, राजा- से पूजा, विद्याधर से अन्न वस्त्र की प्राप्ति होती है।।६३।। वातपित्तमहापीडा देहघातसमुद्भवा । धननाशमवाप्नोति सौम्यसौम्यन्तरे शनिः ।।६४।। (बु.श.) बुध के अंतर में शनि के प्रत्यंतर में वात-पित्त से महापीडा, देह में चोट आदि लगने की सम्भावना और धन का नाश होता है।।६४।। इति बुधप्रत्यन्तरफलम्। अथ केत्वन्तरे केत्वादीनांप्रत्यन्तरफलम्- अपां समुद्भवोऽकस्माद्देशान्तरसमागमः । धननाशोऽल्पमृत्युश्च केतोः केत्वन्तरे शिखी ।।६५।। (के.के.) केतु के अन्तर में केतु के प्रत्यन्तर में अकस्मात जलमार्ग से देशान्तरं की यात्रा, धन की हानि और प्राणभय होता है।।६५।। म्लेक्षभीत्यर्थनाशो वा नेत्ररोगः शिरोव्यथा । हानिश्चतुष्पदानांच केतोः केत्वन्तरे भृगुः ।।६६।। (के.शु.) केतु के अन्तर में शुक्र के प्रत्यन्तर में म्लेक्ष से भय, अत्यंत धन का नाश, नेत्र रोग, शिर में व्यथा और चतुष्पद जीव की हानि होती है।।६६।। मित्रैः सह विरोधश्च स्वल्पमृत्यु, पराजयः । मतिभ्रंशो विवादश्च केतो, केत्वन्तरे रविः ।।६७।। (के.सू.) केतु के अन्तर में सूर्य के प्रत्यंतर में मित्रों से विरोध, अल्पमृत्यु, पराजय, बुद्धि का नाश और विवाद उपस्थित होता है।।६७।। अन्ननाशो यशोहानिर्देहपीडा मतिभ्रमः । आमवातादिवृद्धिश्च केतोः केत्वन्तरे शशी ।।६८।। (के.चं.) केतु के अंतर में चन्द्रमा के प्रत्यंतर में अन्न की हानि, यश की हानि, देह में पीड़ा, बुद्धि में भ्रम और आम-बात की वृद्धि होती है।।६८।। शस्त्रघातेन पातेन पीडितो वह्निपीडया । नीचाद्धीति रिपोः शङ्का केतोः केत्वन्तरं कुजः ।।६९।। (के.मं.) केतु के अंतर में भौम के प्रत्यंतर में शस्त्रलगने से वा गिरने से पीड़ा, अग्नि