बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअथ प्रत्यन्तर्दशाऽध्यायः । ५५९ से पीड़ा, नीच से भय और शत्रु भय की शंक' होती है।।६९।। कामिनीभ्यो भयं भूयात्तथा वैरिसमुद्भवः । शूद्रादपि भवेद्भीतिः केतोः केत्वन्तरे तमः ।।७०।। (के.र.) केतु के अंतर में राहु के प्रत्यंतर में स्त्रियों से भय, राजा से तथा शत्रुओं से भय शूद्र से भी भय होता है।।७०।। धनहानिर्महोत्पातो वस्त्रमित्रविनाशनम् । सर्वत्र लभते क्लेशं केतोः केत्वन्तरे गुरुः ।।७१।। (के.बृ.) केतु के अंतर में गुरु के प्रत्यंतर में धन की हानि, महाउत्पात, वस्त्र, मित्र की हानि और सर्वत्र क्लेश होता है।।७१।। गोमहिष्यादिमरणं देहपीडा सुहृद्वधः । स्वल्पालपलाभकरणं केतोः केत्वंतरे शनिः ।।७२।। (के.श.) केतु के अंतर में शनि के प्रत्यंतर में गौ भैंस आदि का मरण, शरीर में पीड़ा, मित्रों का वध और थोड़ा-थोड़ा लाभ होता है।।७२।। बुद्धिनाशो महोद्वेगो विद्याहानिर्महाभयम् । कार्यसिद्धिर्न जायेत केतोः केत्वन्तरे बुधः ।।७३।। (के.बु.) केतु के अन्तर में बुध के प्रत्यंतर में बुद्धि का नाश, बड़ा उद्वेग, विद्या की हानि महाभय और कार्य की सिद्धि में बाधा होती है।।७३।। इति केतु प्रत्यंतर फलम्। अथ शुक्रान्तरेशुक्रादीनां प्रत्यतरफलम्- श्वेताश्ववस्त्रमुक्ताद्याः स्वर्णमाणिक्य संभवः । लभते सुन्दरी नारी शुक्रे शुक्रांतरे भृगुः ।।७४।। (शु.शु.) शुक्र के अन्तर में शुक्र के प्रत्यंतर में सफेद घोड़ा, सफेद वस्त्र, मोती का लाभ सुवर्ण माणिवय के लाभ की संभावना और सुन्दरी स्त्री का लाभ होता है।।७४।। वातज्वरः शिरःपीडा राज्ञः पीडा रिपोरपि । जायते स्वल्पलाभोऽपि शुक्रे शुक्रान्तरे रविः ।।७५।। (शु.सू.) शुक्र के अंतर में सूर्य के प्रत्यंतर में वातज्वर, शिर में पीड़ा, राजा और शत्रु से पीड़ा और अल्प लाभ होता है।।७५।।