भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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५६० वृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । कन्याजन्म नृपाल्लाभो वस्त्राभरणसंयुतः । राज्याधिकारसंप्राप्ति शुक्रे शुक्रान्तरे शशी ॥७६॥ (शु.चं.) शुक्र के अंतर में चन्द्रमा के प्रत्यंतर में कन्या का जन्म, राजा से वस्त्र-आभूषण का लाभ और राज्याधिकार की प्राप्ति होती है।।७६।। रक्तपित्तादिरोगश्च कलहंताडनं भवेत् । महान्क्लेशोभवेद्र शुक्रे शुक्रान्तरे कुजः ।।७७।। (शु.मं.) शुक्र के अंतर में भौम के प्रत्यंतर में रक्त-पित्त के रोग, कलह-ताडना, और बड़ा कष्ट होता है।।७७।। कलहो जायते स्त्रीभिरकस्माद्भयसंभवः । राजतः शत्रुत: पीडा शुक्रे शुक्रान्तरेतमः ।।७८।। (शु.रा.) शुक्र के अंतर में राहु के प्रत्यंतर में काक सतत् स्त्री से झगड़ा और भय और राजा तथा शत्रु से पीड़ा होती है।।७८।। महद्द्रव्यं महद्राज्यं वस्त्रमुक्तादिभूषणम् । गजाश्वादिपदप्राप्तिः शुक्रे शुक्रान्तरे गुरुः ।।७९।। (शु.वृ.) शुक्र के अंतर में गुरु के प्रत्यंतर में बड़े द्रव्य, बड़े राज्य, वस्त्र, मुक्ता आदि के. आभूषण, हाथी-घोड़ा पद की प्राप्ति होती है।।७९।। खरोष्ट्रछागसम्प्राप्तिर्लोहमाषतिलादिकम् ।