भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 565, कुल 800 में से

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पृष्ठ 565

अथ सूक्ष्मान्तरदशाध्यायः । ५६५ वाहनं छत्रसंयुक्तं राज्यभोगपरं सुखम् । कासश्वासादिका पीडा भौमसूक्ष्मगते बुधे ।।२४।। (मं.बु.) भौम के प्रत्यन्तर में बुध के सूक्ष्मान्तर में वाहन, छत्र आदि राज्य के सुख का लाभ और सुख तथा कासश्वास से पीड़ा होती है।।२४।। परप्रेरितबुद्धिश्च सर्वत्रापि च गर्हितः । अशुचिः सर्वकार्येषु भौमसूक्ष्मगते ध्वजे ।।२५।। (मं.के.) भौम के प्रत्यन्तर में केतु के सूक्ष्मान्तर में दूसरे की प्रेरणा वाली बुद्धि, सर्वत्र निंदा और सभी कार्यों में असफलता होती है।।२५।। इष्ट स्त्रीभोगसम्पत्तिरिष्टभोजनसंग्रहः । इष्टार्थश्चैव लाभश्च भौमसूक्ष्मगते भृगौ ।।२६।। (मं.शु.) भौम के प्रत्यंतर में शुक्र के सूक्ष्मांतर में अभीष्ट स्त्री का सुख, सम्पत्ति अभीष्ट भोजन का लाभ और अभीष्ट की सिद्धि होती है।।२६।। राजद्वेषोद्विजात्क्लेशः कार्याभिप्रायवंचकः । लोकेऽपि निंद्यतामेति भौमसूक्ष्मगते रवौ ।।२७।। (मं.सू.) भौम के प्रत्यंतर में सूर्य के सूक्ष्मांतर में राजा से शत्रुता, ब्राह्मण से कष्ट, कार्य के अभिप्राय से रहित और लोक में निंदा होती है।।२७।। शुद्धत्वं धनसंप्राप्तिर्देवब्राह्मणवत्सलः । व्याधिना परिभूयेत भौमसूक्ष्मगतेविधौ ।।२८।। (मं.चं.) भौम के प्रत्यंतर में चंद्रमा के सूक्ष्मांतर में चित्त में शुद्धता, धन का लाभ, देवता ब्राह्मण में प्रेम और व्याधि से पीड़ित होता है।।२८।। इति भौम सूक्ष्मांतरफलम्। अथ राहु प्रत्यन्तरे राह्वादीनांसूक्ष्मांतरफलम्- लोकोपद्रवबुद्धिश्च स्वकार्ये मतिविभ्रमः । शून्यता चित्तदोषः स्याद्राहोः सूक्ष्मदशाफलम् ।।२९।। (रा.रा.) राहु के प्रत्यंतर में राहु के सूक्ष्मांतर में उपद्रव करने की बुद्धि, बुद्धि में भ्रम, शून्यता होती है।।२९।। दीर्घरोगी दरिद्रश्च सर्वेषां प्रियदर्शनः । दानधर्मरतः शस्तो राहोः सूक्ष्मगते गुरौ ।।३०।। (रा.बृ.)