बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५६६ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । राहु के प्रत्यंतर में गुरु के सूक्ष्मांतर में दीर्घ रोग, दरिद्रता, सबका दर्शन प्रिय, और दानादि में आसक्त होता है।।३०।। कुमार्गात्कुत्सितोग्रश्च दुष्टश्च परसेवकः । असत्संगमतिमूढो राहोः सूक्ष्मगते शनौ ।।३१।। (रा.श.) राहु के प्रत्यंतर में शनि के सूक्ष्मांतर में कुमार्ग से निंदित, उग्रस्वभाव दुष्ट और दूसरे का सेवक और दुष्टों का संग साथ होता है।।३१।। स्त्रीसंभोगमतिर्वाग्मी लोकसम्भावनावृतः । अन्नमिच्छंस्तनुम्लानी राहोः सूक्ष्मगते बुधे ।।३२।। (रा.बु.) राहु के प्रत्यंतर में बुध के सूक्ष्मांतर में स्त्री प्रसंग की बुद्धि, संसार में विख्यात हमेशा अन्न की चिंता से युक्त होता है।।३२।। माधुर्यं मानहानिश्च बंधनं चाप्रमादकम् । पारुष्यं जीवहानिश्च राहोः सूक्ष्मगते ध्वजे ।।३३।। (रा.के.) राहु के प्रत्यंतर में केतु के सूक्ष्मांतर में मधुरस्वभाव, मानहानि, बंधन, कठोरता और किसी जीव की हानि होती है।।३३।। बंधनान्मुच्यते बद्धः स्थानमानार्थसंचयः । कारणद्रव्यलाभश्च राहोः सूक्ष्मगते भृगौ ।।३४।। (रा.शु.) राहु के प्रत्यंतर में शुक्र के सूक्ष्मांतर में बंधन से मुक्ति, स्थान, यश, धन का लाभ और भाग्योदय होता है।।३४।। व्यक्ताशों गुल्मरोगश्च क्रोधहानिस्तथैव च । वाहनादिसुखं सर्वं राहोः सूक्ष्मगते रवौ ।।३५।। (रा.सू.) राहु के प्रत्यंतर में सूर्य के सूक्ष्मांतर में अर्श (बवासीर) गुल्म रोग, क्रोध और वाहनादि के सुख की हानि होती है।।३५।। मणिरत्नधनावाप्तिर्विद्योपासनशीलवान् । देवार्चनपरोभक्त्या राहोः सूक्ष्मगते विधौ ।।३६।। (रा.चं.) राहु के प्रत्यन्तर में चन्द्रमा के सूक्ष्मान्तर में मणि, रत्न, धन की प्राप्ति, विद्या की उपासना और भक्ति से देवता की पूजा होती है।।३६।। निर्जितं जनविद्रावो जने क्रोधश्च बंधनात् । चौर्यशीलरतिः नित्यं राहोः सूक्ष्मगते कुजे ।।३७।। (रा.म.)