बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
पृष्ठ 567, कुल 800 में से
संदर्भ में पढ़ेंअथ सूक्ष्मान्तरदशाध्यायः । ५६७ राहु के प्रत्यन्तर में भौम के सूक्ष्मान्तर में मनुष्यों से विद्रोह, पराजय, जन समुदाय का क्रोध भाजन, बंधन और चौर भय होता है।।३७।। इति राहु सूक्ष्मन्तरफलम्। अथ गुरु प्रत्यन्तरे गुर्वादीनांसूक्ष्मान्तरफलम् - शोकनाशो धनाधिक्यमग्निहोत्रं शिवार्चनम् । वाहनक्षत्रसंयुक्तं जीवसूक्ष्मदशाफलम् ।।३८।। (वृ.वृ.) गुरु के प्रत्यन्तर में गुरु के सूक्ष्मान्तर में शोक का नाश, धन का लाभ, शिव का पूजन, वाहन और क्षेत्र का लाभ होता है।।३८।। व्रतहा सूर्यवर्त्ती च विदेशे वसुनाशनम् । विरोधो धननाशश्च गुरोः सूक्ष्मगते शनौ ।।३९।। (वृ.श.) गुरु के प्रत्यन्तर में शनि के सूक्ष्मान्तर में व्रत का छूट जाना, विदेश में धन का नाश, शत्रुता और धन की हानि होती है।।३९।। विद्यामानयशप्राप्तिः धनागमनमेव च । नित्योत्सवस्तुसंजातः गुरोः सूक्ष्मगते बुधे ।।४०।। (वृ.बु.) गुरु के प्रत्यंतर में बुध के सूक्ष्मान्तर में विद्या, मान और यश का लाभ, धन का आगमन और नित्य उत्सव होता रहता है।।४०।। ज्ञानं विभवपाण्डित्यं शास्त्रश्रोता शिवार्चनम् । अग्निहोत्रं गुरोर्भक्तिर्गुरोः सूक्ष्मगते ध्वजे ।।४१।। (वृ.के.) गुरु के प्रत्यंतर में केतु के सूक्ष्मान्तर में ज्ञान में वृद्धि, विभव, पांडित्य, शास्त्र का अध्ययन, शिव की पूजा और अग्निहोत्र और गुरु भक्ति होती है।।४१।। रोगान्मुक्तिः सुखं भोगं धनधान्यसमागमम् । पुत्रदारादिकं सौख्यं गुरोः सूक्ष्मगते भृगौ ।।४२।। (वृ.शु.) गुरु के प्रत्यंतर में शुक्र के सूक्ष्मान्तर में रोग से मुक्ति, सुख, भोग, धन, धान्य का लाभ और पुत्र स्त्री आदि का सुख होता है।।४२।। वातपित्तप्रकोपश्च श्लेष्मोद्रेकस्तु दारूणः । रसव्याधिकृतं शूलं गुरोः सूक्ष्मगते रवौ ।।४३।। (वृ.सू.) गुरु के प्रत्यंतर में सूर्य के सूक्ष्मान्तर में वायु और पित्त का प्रकोप कफ की अधिकता से कष्ट और रसदोष से शूलरोग होता है।।४३।।