भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 595, कुल 800 में से

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पृष्ठ 595

अष्टकवर्गाध्यायः । ५९५ ने जन्मकालीन ग्रहस्थिति और जन्मलग्न स्थित राशि इन आठ स्थानों से यदि गोचर फल का विचार किया जाय तो अवश्य विश्वास योग्य होगा। ऐसा निश्चय किया है। इसी को अष्टक वर्ग विधि कहते हैं। प्रत्येक जन्मकुंडली में सातग्रह और जन्मलग्न अर्थात् इन आठ पदार्थों से किसी न किसी स्थान में शुभ और अशुभ फलों में विशेषता हो जाती है। इसी को आचार्यों ने प्रत्येक ग्रह एवं लग्न अपने अपने स्थान से जिन जिन स्थानों में शुभ फल देता है इस शुभफल दायित्व स्थान को रेखा या बिन्दुद्वारा दिखलाया है। किसी आचार्य ने बिन्दु संकेत से शुभफल माना है और किसी ने रेखा द्वारा शुभ फल माना है इसके भ्रम में नहीं पड़ना चाहिये चाहे जिस चिह्न से मानाजाय। इस ग्रंथ में शून्य को करण कहते हैं। अतः सूर्य की करण संख्या कह रहे हैं- सूर्य से १, २, ८, ३, १२ भावों में पांच पांच करण होता है।, ७, ४ भाव में चार चार करण होता है। ६, ९ भाव में तीन तीन करण होता है। ५ भाव में ६ करण होता है। १० भाव में दो करण और ११ भाव में एक करण होता है। १९ अर्थात् सूर्य से १, २, ८ भाव में लग्न, चंद्र, शुक्र और बुध ये पांच ग्रह करण देने वाले हैं, १२ वें भाव में सूर्य, भौम, शनि, चंद्र, गुरु ये पांच करण देने वाले हैं।।२०।। सुखे होरेन्दुशुक्राश्च धर्मेऽर्कार्किकुजा अरौ । होराज्ञार्येंदवः कामे भवे दैत्येन्द्रपूजितः ॥२१॥ ४ थे भाव में बुध, चन्द्र, शुक्र, गुरु ये चार ग्रह करण देने वाले हैं। नवम भाव में लग्न, चन्द्र, शुक्र ये तीन ग्रह करण प्रद हैं। ६ भाव में सूर्य शनि, मंगल ये तीन ग्रह करण देने वाले हैं। ७ भाव में लग्न, बुध, शुक्र, चंद्र ये चार ग्रह करण देने वाले हैं। ११ भाव में केवल शुक्र करण देने वाले हैं।।२१।। सहजेऽर्कार्किशुक्रार्यभौमाः खे गुरुभार्गवौ । सुतेऽर्कार्कीन्दुलग्नारशुक्राः स्युः करणं रवेः ॥२२॥ तीसरे भाव में सूर्य, शनि, शुक्र, गुरु, मंगल ये पांच ग्रह करण देने वाले हैं। १० भाव में गुरु, शुक्र ये दो ग्रह करण देने वाले हैं। ५ भाव में सूर्य, शनि, चंद्र, लग्न, मंगल, शुक्र ये छः ग्रह करण देने वाले हैं। यह सूर्य की करण संख्या है।।२२।।