बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
पृष्ठ 598, कुल 800 में से
संदर्भ में पढ़ें५९८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम्। कुजस्यार्केन्दुविज्जीवसिता लग्नशनी च ते । सितारगुरुमंदाः स्युर्धर्मोक्तेषु कुजं विना ।।२८।। भौम से १ भाव में सूर्य, चंद्रमा, बुध, गुरु, शुक्र ये ५ करणप्रदग्रह हैं, २ भाव में लग्न, शनि, सूर्य, चन्द्र, बुध, गुरु, शुक्र ये ७ करणप्रद ग्रह हैं। ३ भाव में शुक्र, भौम, गुरु, शनि ये ४ करणप्रद हैं। ४ भाव में सूर्य, चंद्र, बुध, गुरु, शुक्र लग्न ये ६ ग्रह करणप्रद हैं।।२८।। चन्द्रारगुरुशुक्रार्किलग्नानि कुजभास्करी । ज्ञेन्द्वर्कसितलग्नार्या एषु शुक्रं विना ततः ।।२९।। ५ भाव में चन्द्र, भौम, गुरु, शुक्र, शनि, लग्न ये ६ ग्रह करणप्रद हैं। ६ भाव में भौम, शनि ये दो करणप्रद हैं, ७ भाव में बुध, चंद्र, सूर्य, शुक्र, गुरु ये ६ करणप्रद ग्रह हैं।।२९।। विना शनिं सप्तधर्मे सितेन्दुज्ञा वियत्ततः । अर्कार्किक्षेंदुलग्णाराः करणं प्रोच्यते क्रमात् ।।३०।। ८ भाव में बुध, चंद्र, सूर्य, गुरु, लग्न ये ५ करणप्रद ग्रह हैं, ९ भाव में सूर्य, चन्द्र, भौम, बुध, गुरु, शुक्र लग्न ये ७ करणप्रद ग्रह है, १० भाव में शुक्र, चंद्र, बुध ये तीन करणप्रद ग्रह हैं। ११ भाव में शून्य और १२ भाव में सूर्य, शनि, बुध, चंद्र, लग्न, भौम ये ६ करणप्रद ग्रह हैं।।३०।। स्पष्टार्थभौमकरणचक्रम्।
| भा. | सू. | चं. | मं. | बु. | वृ. | शु. | श. | ल. | स. |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त. | ० | ० | ० | ० | ० | ५ | |||
| ध. | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ७ | |
| स | ० | ० | ० | ० | ४ | ||||
| सु. | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ६ | ||
| सु. | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ६ | ||
| रि. | ० | ० | २ | ||||||
| जा | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ६ | ||
| मृ. | ० | ० | ० | ० | ० | ५ | |||
| ध. | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ७ | |
| क. | ० | ० | ० | ३ | |||||
| आ | |||||||||
| व्य | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ६ |