बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
पृष्ठ 599, कुल 800 में से
संदर्भ में पढ़ेंअष्टकवर्गाध्यायः। ५९९ अथ बुधस्य करण संख्यां करणप्रदग्रहांश्चाह- तनुस्वगृहकर्मारि धर्मेष्वग्निर्मृतौ करौ । मातृस्त्रियों रसा लाभे शून्यं पुत्रे व्यये शराः ॥३१॥ बुध से १,२,४,१०,६,९ भाव में तीन करण, ८ भाव में २ करण, ३, ७ भाव में ६ करण, ११ भाव में शून्य और १२ भाव में ५ करण होता है॥३१॥ बुधस्यार्केन्दुगुरवो गुरुसूर्यबुधाः क्रमात् । लग्नाक्रारार्विचंद्रार्या ज्ञाकार्या हि बुधस्यतु ॥३२॥ बुध से १ भाव में सूर्य, चंद्र, गुरु ये तीन करणप्रद ग्रह हैं, २ भाव में गुरु, सूर्य, बुध ये तीन करणप्रद ग्रह हैं। ३ भाव में लग्न, सूर्य, शनि, चंद्र, भौम, गुरु ये ६ करणप्रद ग्रह हैं, ४ भाव में बुध, सूर्य, गुरु ये तीन करणप्रद ग्रह हैं॥३२॥ जीवारेन्द्वार्किलग्नानि शुक्रमंदधरासुताः । ज्ञेन्दुलग्नार्कशुक्रार्या ज्ञाकौ जीवेन्दुलग्नकाः ॥३३॥ अकार्यशुक्राः शून्यं च होरेन्द्वारार्किभार्गवाः । ५ भाव में गुरु, भौम, चंद्र, शनि, लग्न ये ५ करणप्रद ग्रह हैं। ६ भाव में शुक्र, शनि, भौम ये तीन करणप्रद ग्रह हैं। ७ भाव में बुध, चंद्र, लग्न, सूर्य, शुक्र, गुरु ये ६ करणप्रद ग्रह हैं, ८ भाव में बुध, सूर्य ये दो करणप्रद ग्रह हैं। ८ भाव में बुध, सूर्य ये दो करणप्रद ग्रह हैं। ९ भाव में गुरु, चंद्र, लग्न ये ३ करणप्रद ग्रह हैं, १० भाव में सूर्य, गुरु, शुक्र ये तीन करणप्रद ग्रह हैं, ११ भाव में शून्य और १२ भाव में लग्न, चंद्र, भौम, शनि, शुक्र ये ५ करणप्रद ग्रह हैं॥३३॥ स्पष्टार्थबुधकरणचक्रम्।
| मा | सू. | चं. | मं. | बु. | बृ. | शु. | श. | ल. | स |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त. | ० | ० | ० | ३ | |||||
| ध. | ० | ० | ० | ३ | |||||
| स. | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ६ | ||
| सु. | ० | ० | ० | ३ | |||||
| सु. | ० | ० | ० | ० | ० | ५ | |||
| रि. | ० | ० | ० | ३ | |||||
| जा. | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ६ | ||
| मृ. | ० | ० | २ | ||||||
| क. | ० | ० | २ | ||||||
| धः | ० | ० | ० | ३ | |||||
| आ | |||||||||
| व्य | ० | ० | ० | ० | ० | ५ |