बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६१० बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । अथ लग्नस्य भावस्थानप्रदान्ग्रहानाह- अथ स्थानं प्रवक्ष्यामि लग्नस्य द्विजपुंगव ॥६८॥ हे मैत्रेय! रेखा को ही स्थान कहते हैं। लग्न के रेखाप्रद ग्रहों को कह रहा हूँ॥६८॥ आर्किज्ञशुक्रगुर्वाराः सौम्य देवेज्यभार्गवाः । हित्वा सौम्यगुरु शेषाः सूज्ञेज्यभृगुसूर्यजाः ॥६९॥ लग्न भाव में शनि, बुध, शुक्र, गुरु, भौम ये ५ ग्रह रेखाप्रद हैं। २ भाव में बुध, गुरु, शुक्र ये रेखाप्रद हैं॥६९॥ तथा जीवभृगुवुधौ सर्वे शुक्रं बिना क्षते । जीव एकस्तथा द्यूने मृतौ सौम्यभृगू तथा ॥७०॥ ३ भाव में सूर्य, चंद्र, भौम, शुक्र, शनि, लग्न रेखाप्रद हैं। ४ भाव में सूर्य, बुध, गुरु, शुक्र, शनि रेखाप्रद हैं। ५ भाव में गुरु, शुक्र रेखाप्रद हैं। ६ भाव में सूर्य, चंद्र, भौम, बुध, गुरु, शनि लग्न रेखाप्रद हैं।