बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६४ .. बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् गुलिको मृत्युकालश्च दावाग्निर्घोरसंज्ञकः ।। ३३ ।। २५ देव, २६ आर्द्र, २७ कलिनाश, २८ क्षितीश, २९ कमलाकर, ३० गुलिक, ३१ मृत्यु, ३२ काल, ३३ दावाग्नि, ३४ घोर ।। ३३ ।। यमश्च कण्टकसुधाऽमृतौ पूर्णनिशाकरः । विषदग्धकुलान्तश्च मुख्यो वंशक्षयस्तथा ।। ३४ ।। ३५ यम, ३६ कंटक, ३७ सुधा, ३८ अमृत, ३९ पूर्णचन्द्र, ४०. विषदग्ध, ४१ कुलनाश, ४२ मुख्य, ४३ वंशक्षय ।। ३४ ।। उत्पातकालसौम्याख्याः कोमलः शीतलाभिधः । करालदंष्ट्रचन्द्रास्यौ प्रवीणः कालपावकः ।। ३५ ।। ४४ उत्पात, ४५ काल, ४६ सौम्य, ४७ कोमल, ४८ शीतल, ४९ करालदंष्ट्र, ५० इन्दुमुख, ५१ प्रवीण, ५२ कालाग्नि ।। ३५ ।। दण्डभृन्निर्मलः सौम्यः क्रूरोऽतिशीतलोऽमृतः । पयोधि भ्रमणाख्यौ च चन्द्ररेखात्वयुग्मपौ ।। ३६ ।। ५३ दंडभृत्, ५४ निर्मल, ५५ सौम्य, ५६ क्रूर, ५७ अतिशीतल, ५८ अमृत, ५९ भ्रमण और ६० इन्दुरेखा ।। ३६ ।। समे भे व्यत्ययाज्ज्ञेयाः षष्ठ्यंशाश्च प्रकीर्तिताः । षष्ठ्यंशस्वामिनस्त्वोजे तदीशाद् व्यत्ययतः समे ।। ३७ ।। विषम राशि में घोर आदि और सम राशि में चन्द्ररेखा आदि क्रम से षष्ठ्यंश के अधिपति होते हैं ।। ३७ ।। शुभषष्ठ्यंशसंयुक्ता ग्रहाः शुभफलप्रदाः । क्रूरषष्ठ्यंशसंयुक्ता नाशयन्ति खचारिणः ।। ३८ ।। शुभग्रहं के षष्ठ्यंश में ग्रह हो तो शुभफल देता है और क्रूर ग्रह के षष्ठ्यंश में हो तो नाश करता है ।। ३८ ।। राशीन् विहाय खेटस्य द्विघ्नमंशाद्यमर्कहृत् । शेषं सैकं च तद्राशिनाथ षष्ठ्यंशपाः स्मृताः ।। ३९ ।। जिस ग्रह का षष्ठ्यंश देखना हो उसकी राशि को छोड़कर अंश, कला, विकला आदि को २ से गुणा कर गुणनफल में १२ से भाग देने पर जो शेष बचे उसमें १ जोड़कर जो संख्या हो उतनी ही संख्या वाली ग्रह की राशि से जो राशि हो उसके स्वामी षष्ठ्यंश के स्वामी होते हैं ।। ३९ ।। उदाहरण—लग्न ९।१५।२२।३७ है। इसकी राशि को छोड़कर अंशादि को २ से गुणा करने से ३०।४५।१४ हुआ। इसमें १२ से भाग