भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

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पृष्ठ 63

षोडशवर्गाध्यायः ६५ देने पर शेष ६ बचा। इसमें १ और जोड़ देने से ७वाँ षष्ठ्यंश हुआ। मकर से ७वीं राशि कर्क के स्वामी चन्द्रमा षष्ठ्यंश के स्वामी हुए। दूना किये हुए अंश ३० में १ जोड़ देने से ३१वाँ सम राशि में कुलिक षष्ठ्यंश का अधिपति हुआ। अथ षष्ठ्यंशचक्रम्—

सं.स्वामीमे.वृ.मि.क.सिं.कं.तु.वृ.ध.म.कुं.मी.स्वामीअं. क.
घोर१०१११२इन्दुरेखा०।३०
राक्षस१०१११२भ्रमण१।०
देव१०१११२पयोधीश१।३०
कुबेर१०१११२सुधा२।०
यम१०१११२अ.शीतल२।३०
किन्नर१०१११२क्रूर३।०
भ्रष्ट१०१११२सौम्य३।३०
कुलघ्न१०१११२निर्मल४।०
गरल१०१११२दण्डायुध४।३०
१०अग्नि१०१११२कालाग्नि५।०
११माया१११२१०प्रवीण५।४०
१२पुरीष१२१०११इन्दुमुखी६।०
१३अपांपति१०१११२दंष्ट्राकराल६।३०
१४मरुत्वान्१०१११२शीतल७।०
१५काल१०१११२कोमल७।३०
१६अहि१०१११२सौम्य८।०
१७अमृत१०१११२कालरूप८।३०
१८चन्द्र१०१११२उत्पात९।०
१९मृदु१०१११२वंशक्षय९।३०
२०कोमल१०१११२कुलनाश१०।०
२१हेरम्ब१०१११२विषदग्ध१०।३०
२२ब्रह्म१०१११२पूर्णचंद्र११।०
२३विष्णु१११२१०अमृत११।३०
२४महेश्वर१२१०११सुधा१२।०
२५देव१०१११२कंटक१२।३०
२६आर्द्र१०१११२यम१३।०
२७कलिनाश१०१११२घोर१३।३०
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