भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

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पृष्ठ 625

अथ द्वितीयोऽध्यायः । ६२३ कालबलचक्र।

सू.चं.मं.बु.बृ.शु.श.ग्रह
अंश
५४५४१७३८२७१२३२कला
५०५२५२२५५२विकला
अयनबलसाधन-
आधाने चित्रवेशे तु त्रिंशच्छरजलकराः ।
सायनांशग्रहभुजराशीनिष्खब्धिभिः सुरैः ।।२१।।
सूर्यैर्हत्वा क्रमाद्राशिभागः स्यादा्नुपातः ।
एवं राश्यादिके युंज्यादर्करायोर्शनः सु च ।।२२।।
राशित्रयमथो युंज्यान्मेषादिस्थेषु तेष्वथ ।
तुलादिस्थेषु राश्यादींस्त्रिराशिभ्यस्तु वर्जयेत् ।।२३।।
चन्द्राकर्योर्विपरीतं स्यात्सदा युंज्याद्बुधस्य तु ।
भागीकृत्य त्रिभिर्भक्तं ग्रहाणामयनं बलम् ।।२४।।
अयनांश युत ग्रह के भुज राशि के तुल्य ध्रुवांक से ४५।३३।१२ गुण कर
३० से भाग देकर लब्धि में गतखंड को जोड़कर राश्यादि बनाकर तुलादि ६ राशि
में ३ घटा देना मेषादि ६ राशि में हो तो ३ जोड़ देना। परन्तु चन्द्र शनि में विलोम
करना अर्थात् तुलादि में जोड़ना और मेषादि में घटाना, बुध में सर्वदा ३ राशि
जोड़ना और अंश करके ३ से भाग देने से अयनबल होता है किन्तु सूर्य के बल
को दूना करने से अयन बल होता है। २१+२४।
उदाहरण- सूर्य ३।१८।२६।३४ इसमें अयनांश २१।५१।१८ जोड़ने
से ४।१०।१७।५२ हुआ इसका भुज बनाने से १।१९।४२।८ हुआ, यहाँ पूर्वोक्त
नियम के अनुसार १ राशि का ध्रुवांक ३३ प्राप्त हुआ, इससे अंश कला विकला
को गुण देने से ६५१।६।२४ हुआ इसमें गतखंड ४५ को जोड़ देने से
९६।६।२४ इसका राशि कर मेषादि में होने से ३ राशि जोड़कर राशि के अंश
बनाकर इसमें ३ का भाग देने से लब्ध ६२।२।२ यह सूर्य का अयन बल हुआ
इसी प्रकार अन्य ग्रहों का भी साधन करना।
अयनबलचक्र।
सू.चं.बं.बु.बृ.शु.श.ग्रह
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१२४१७४६४२५९५३अंश.
५१११३८११५९कला
४४३०४३४५५०१५४७विकला