बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
DevanagariHindipublished800 पृष्ठ
पृष्ठ 652, कुल 800 में से
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६५० बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । समुदायाष्टकवर्गचक्र।
| राशि | मे. | वृ. | मि. | क. | सिं. | कं. | तु. | वृ. | ध. | म. | कुं. | मी. | योग |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ग्रह | शु.<br>चं. | सू. | बु.<br>बृ. | श. | मं. | ||||||||
| सू. | ५ | ५ | ४ | ३ | ४ | २ | ४ | ६ | ५ | ४ | ३ | ३ | ४८ |
| चं. | ५ | ३ | ५ | २ | ४ | ३ | ४ | ५ | ५ | २ | ४ | ७ | ४९ |
| मं. | ३ | ५ | ४ | २ | ३ | ३ | २ | ६ | ३ | ४ | २ | २ | ३९ |
| बु. | ४ | ४ | ६ | ५ | ५ | ५ | ३ | ५ | ४ | ५ | ४ | ४ | ५४ |
| बृ. | ६ | ५ | ३ | ४ | ४ | ५ | ६ | ५ | ३ | ४ | ६ | ५ | ५६ |
| शु. | ६ | ४ | ७ | ४ | ४ | ४ | ४ | १ | ३ | ६ | ५ | ४ | ५२ |
| श. | ७ | ३ | ४ | ४ | २ | १ | २ | ५ | २ | ५ | १ | ३ | ३९ |
| ३६ | २९ | ३६ | २४ | ३६ | २३ | २५ | ३३ | २५ | ३० | २५ | २८ | ||
| नोट- सर्वाष्टक वर्ग में सभी अष्टवर्गों में मेषादि राशियों में कितनी-कितनी | |||||||||||||
| रेखायें प्राप्त हुई हैं और उनका योग क्या हुआ लिखना चाहिये। | |||||||||||||
| अष्टकवर्ग कुंडली |
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| (२५)११मं \ (३०)१० / (२५)९. |
| \ / |
| (२८)१२ \ / (२३)८श |
| \--------------------------------------/ |
| | | |
| | (२५)७ | |
| (३६)१ | | |
| | | |
| |------------------------------------| |
| / \ (२६)६ |
| .(१९)२ / \ |
| / (२४)सू.४ \ |
| शु(३६)३च / \ बु(२६)वृ५ |
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मातृपित्रोः मृत्युकालः। ग्रहयोगेन हानिः स्यात् वर्णाद्यं पृथक्ततः । संयोज्य सप्तभिर्हत्वा सप्तविंशति भाजिताः ॥१८४॥ एकाधिपत्य शोधन करने से राशियों के नीचे जो अंक आये हैं चाहे वे शून्य हों या रेखा हों उन्हें राशि के ध्रुवांकों से पृथक्-पृथक् गुण देना और जिस राशि में ग्रह हैं उनके अंकों को उन उन ग्रहों के ध्रुवांकों से गुणकर पृथक्-पृथक् रखकर, राशियों के गुणनफल का योग और ग्रहों के गुणनफल का योग कर दोनों को एक जगह जोड़कर सात ७ से गुणकर उसमें २७ से भाग देने से॥१८४॥