भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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अष्टकवर्गफलाध्यायः । ६५९ यदि भौम निर्बल हो तो भाई दीर्घायु होता है। और जिस राशि में फल की कमी हो उस पर भौम के जाने से भूमि की हानि होती है।।२७।। तद्राशिफलसंख्यैश्च वर्धयेच्छोध्यपूर्ववत् । शेषर्क्षे च शनौ याते भ्रातृहानिर्विनिर्दिशेत् ।।२८।। फलों के योग को पिंड से गुणा कर पूर्ववत् २७ का भाग देने से शेष नक्षत्र मे शनि के जाने से भाई की मृत्यु होती है।।२८।। अथ बुधाष्टकवर्गफलम् – बुधात्तूर्ये कुटुम्बं च धनं मित्रादिमातुलाः । तत्पंचमे मंत्रविद्यालिपि बुध्यादि चिंतयेत् ।।२९।। बुध से चौथे भाव में कुटुम्ब, धन, मित्र, मामा आदि का और बुध से पाँचवें भाव में मंत्र शास्त्र, लेखन और बुद्धि का विचार करना चाहिये।।२९।। बुधाष्टवर्ग संशोध्य शेषमृक्षगते शनौ । बंधुमित्रादि नाशादींल्लभतेनात्र संशयः ।।३०।। बुधाष्टक वर्ग में पूर्ववत् संशोधन करके राशिपिंड से योग पिंड को गुणाकर २७ से भाग देने से शेष नक्षत्र या उसके त्रिकोण नक्षत्र में शनि के जाने से बंधु मित्रादि का नाश होता है।।३०।। अथ गुर्वष्टकवर्गफलम् – • जीवात्पंचमतो ज्ञानं पुत्रधर्मधनादिकम् । गुरोरष्टकवर्गेषु संतानमपि कल्पयेत् ।।३१।। गुरु से पाँचवें भाव में संतान का विचार करना चाहिये। इसी प्रकार गुरु के अष्टकवर्ग में भी संतान विचार करना चाहिये।।३१।। गुरुस्थितसुतस्थाने यावच्च विद्यते फलम् । शत्रुनीचगृहं त्यक्त्वा तावंतश्च सुताः स्मृताः ।।३२।। गुरु से पाँचवें भाव में जितना फल हो उतने ही संख्यक संतान होते हैं यदि वह राशि गुरु की शत्रु और नीच राशि न हो तो।।३२।।