भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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दशमोऽध्यायः । ६७९ हे मैत्रेय! अब मैं हरण आदि से शुद्ध मनुष्यों के परम आयु को तुमसे कह हूँ। उसमें प्रथम पिंडायु है जो १२ प्रकार का है, ध्रुवायु (निसर्गायु) ४ प्रकार ।१।। अंशकाष्टकवर्गोत्थौ प्रत्येकं तु चतुर्विधम् । विषयोक्तो द्विधा प्रोक्तौ नक्षत्रांशकसंभवौ ॥२।। रश्मि से उत्पन्न आयु ४ प्रकार का, अंशोद्भव ४ प्रकार का, अष्टवर्गोद्भव कार का सब मिलकर १६ प्रकार, नक्षत्रोत्पन्न २ प्रकार और अंशोद्भव २ प्रकार कुल मिलाकर ३२ प्रकार के आयु के भेद होते हैं।।२।। अथ पिंडायुषः ध्रुवांकाः- द्वात्रिंशद्भेदभिन्नं स्यात्परमायुर्नृणामिह । अतिधृतिरर्कस्येन्दोस्तत्वानि पंचदश ।।३।। सूर्यादि ग्रह अपने परमोच्च में हों तो क्रम से सूर्य का १९, चन्द्रमा का २५, का १५, बुध का १२, गुरु का १५।।३।। द्वादशवुधस्य च गुरोस्तिथिः कवेर्मूच्छनानखाश्चार्किः । परमोच्चे च नीचेऽर्धं परेषुभावेषु वा तथा प्रोक्ताः ।।४।। शुक्र का २१ और शनि का २० पिंडायु का ध्रुवांक होता है और नीच में तो अपने २ ध्रुवांक का आधा ध्रुवांक होता है।।४।। अनुपातः कर्त्तव्यस्वंतरसंस्थेषु खेतेषु । खखभूमेः खयुग्मेंद्वो स्वांशाः पूर्ववत्कृतौ ।।५।। उक्त नीच के मध्य में ग्रहो हो तो अनुपात द्वारा फल की आना चाहिये। और ग्रहों की १०० या १२० वर्ष की परमायु होती है।।५।। नैसर्गिक रश्मिजायुषोः ध्रुवांकाः। कृतिरेको यमौ रत्नमष्टादश नखाः क्रमात् । सैकंतानमिनादीनशं दाये नैसर्गिके स्मृतम् ।।६।। सूर्यादि अपने उच्च में हों तो सूर्य का २०, चन्द्र का १, भौम का २, का ९, गुरु का १८, शुक्र का २० और शनि का ५० ध्रुवांक नैसर्गिक में है।।६।। षोडशविंशतिरेको नवाष्टनव पंचविंशतिः । षड्विंशतिस्तथोच्चे नीचेचार्द्धं रश्मौचत्विमेऽथवा ।।७।। उसी प्रकार से सूर्यादि उच्च में हो तो सूर्य का १६, चंद्र का २०, भौम