भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 723, कुल 800 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 723

अथ चतुर्दशोऽध्यायः । ७११ प्रेष्यो गोमयविक्रेता वदान्योधनवंचकः । सेनानीः क्षेत्रवान् वीरो लेखवृत्या च जीवति ।।३५।। मूर्खों जितेन्द्रियो वाग्मी सदाकृत्यपरः सुखी । अन्नदाताच मिष्ठाशी शिवभक्तो जितेन्द्रियः ।।३६।। कुब्जो वक्रशरीरश्च जात्यंधो वधिरः शठः । अमर्षी नर्तकः क्रुद्धो दुर्जनो वेदपारगः ।।३७।। वक्ता च गायकः श्रीमान् सर्वदा चजनार्जकः । तालज्ञो विद्यया युक्तः पंच पंचासदुत्तरम् ।।३८।। शतं गुणाश्च श्रीयोगा एकयोगावसानक्रमम् । पूर्वपूर्वयुता ओजे युग्मे राशौ तु वामतः ।।३९।। चरे क्रमः स्थिरे वाममुभयोर्धपदादितः । आदौ त्रिंशद्गुणा ह्यतै वामतस्त्रिंशदेवहि ।।४०।। षष्ठ्यंशेतु गुणः प्रोक्ताः प्राग्वदोजचरादिकाः । दशवर्ग से फलादेश कहते हैं जो कि स्पष्ट हैं। विशेष यह है कि विषम नवांश हो तो श्रीमान् योग से समराशि का नवांश हो तो विद्वान् योग से आरम्भ कर श्रीमान् योग तक और चर राशि में क्रम से स्थिर राशि में विलोम से द्विस्वभाव राशि में अर्धभाग से क्रम लेना चाहिये।।३९-४०।। राहोः गतिः- मेषादुत्क्रमतो राहुः केतुर्यादि वृषात्क्रमात् ।।४१।। राहु मेष राशि से विपरीत क्रम से और केतु वृष राशि से क्रम से जाता है।।४१।। अस्य प्रयोजनम् - ऋक्ष संध्यन्तरे जातः प्रष्टासौ म्रियते भृशम् । केतुराहुस्थिते राशौ भसंधौ मरणं भवेत् ।।४२।। राहु केतु नक्षत्र प्रवेशान्तर के समय जन्म हो तो निश्चय ही प्रश्नकर्त्ता की मृत्यु होती है।।४२।। इतरेषां त्रयाणां च प्रकाशे व्याधिपीडितः । दुर्बलो बुद्धिहीनश्च जायते न मृतो यदि ।।४३।।