भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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अथ चतुर्दशोऽध्यायः । ७१५ चतुर्दशग्रहाणांषष्ठ्यंशादिः- खाक्ष्यद्रयस्तुषष्ठ्यंशास्त्रिंशांशाः खरसान्ग्नयः ।।६४।। बारह राशियों में ७२० षष्ट्यंश।।६४।। अष्टषट्भूमयः कालहोराः सप्तदिनेषु च । वेदेन्द्रा द्वादशांशा, स्युर्नवांशा गजखेंदवः ।।६५।। ३६० त्रिंशांश, १६८ कालहोरांश, १४४ द्वादशांश, १०८ नवांश।।६५।। सप्तांशा वेदनागास्तु द्रेक्काणास्तु षडग्नयः । अर्धहोराजिनाः प्रोक्ता नक्षत्राणि चराशयः ।।६६।। ८४ सप्तमांश, ३६ द्रेष्काणांश और २४ अर्धहोरांश ये क्रम से नक्षत्र राशि के होते हैं।।६६।। भुंजते च ग्रहाश्चैव मनुसंख्यैश्च भुंजते । राशयश्च ग्रहाश्चैव नक्षत्राणि च भुंजते ।।६७।। इनको १ सूर्य, २ चन्द्र, ३ भौम, ४ बुध, ५ गुरु, ६ शुक्र, ७ शनि, ८ राहु, ९ केतु।।६७।। ख्यादिशिखिपर्यन्ता नवभूमेन्द्रकार्मुकौ । पातश्च परिवेशश्च कालश्चेति चतुर्दश ।।६८।। १० भूमा, ११ इन्द्रचाप, १२ पात, १३ परिवेश, १४ काल ये भोगते हैं। कौन किस अंश में है इसे देखकर फल का विचार करना चाहिये।।६८।। अथ नक्षत्रगणनाक्रमः- तेषां प्रादुर्भावे चैव भंगदास्तु नवग्रहः । दस्रात्पंच भगात्षट्क पंचार्द्राद्दारूणादपि ।।६९।। अश्विनी से ५, पूर्वाफाल्गुनी से ६, आर्द्रा से ५, शतभिष से ४।।६९।। मित्रान्नवक्रमात्प्रोक्तास्तत्तद्देशेषु सर्वदा । अक्षिणी पंचदश च नखास्तत्त्वं तथामराः ।।७०।। और अनुराधा से ७ ये नक्षत्र पूर्वोक्त अंशों में रहते हैं क्रम से २।१५।२०।२५।३३ ।।७०।। सत्र्यंशाश्चषडंशोनाश्चत्वारिंशत्क्रमादथ । शतं खेष्विंदवः प्रोक्ता विनाडीतनयोऽपिच ।।७१।। ३३।३३।४०।१००।१५० ये नाडियाँ अर्धहोरा आदि के योगकाल हैं।।७१।।