बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७१४ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । योगान्तरम् - रविचन्द्रतमपातकालेष्वरिभवेषु च । पंचाशीतिशते वेदे मनौद्वित्रिशते पुनः ।।५८।। यदि सूर्य चन्द्र राहु पातकाल में ६।११ तथा ८५।२००।४।१४।२।३।२०० ।।५८।। खाब्धिपंचंसु दिग्भागे सहस्रे चाक्षिचन्द्रगे । खखाग्निरूपं विश्वाष्ट त्रिचन्द्रखखभूमिपैः ।।५९।। ४०।५।१०।१३००।१३।८।३।१।१६०० इन योगों में चन्द्रमा युक्त हो तो बधिर होता है।।५९।। मृत्युकालज्ञानम् - शताधिके च जातोऽस्मिन्वधिरः षष्ठि संयुतो । कर्किवृश्चिकमीनांशे तद्राशीशांशके तथा ।।६०।। कर्क, वृश्चिक और मीन के अंश में इनके स्वामियों के (चंद्र, भौम, गुरु) इनके नवांश में।।६०।। पातकेत्वोश्च शत्र्वृक्षगतयो रंशकेपुनः । एकादित्रिंशतैर्वित्क्रमात्तास्तु सुभाजिताः ।।६१।। पात में अथवा उच्च, शत्रु राशि में स्थित ग्रह के अंश में जो संख्या हो उससे १ से लेकर ३०० तक।।६१।। आकाशपूर्णधृतयो निःशेषं लब्धसंख्यके । सदोषेऽतराशेतु जातस्यैतेऽपमृत्यवः ।।६२।। १८०० में भाग देना जिससे निःशेष हो जो लब्धि प्राप्त वह यदि सदोष (पापग्रह से युक्त हो) तो जातक का लब्धि तुल्य वर्ष में अपमृत्यु कहना।।६२।। अल्पंमध्यदीर्घायुर्ज्ञानम् - पंचाशतः षडावृत्या स्वल्पमध्यचिरायुषः । क्रमेणोत्क्रमशस्ते तु त्रैराशिकविधानतः ।।६३।। पीछे कहे हुये ५० कुब्ज आवृत्ति के वर्ष से त्रैराशिक रीति से गणना करके प्रथम आवृत्ति में अल्पायु दूसरे आवृत्ति में मध्यमायु और तीसरे आवृत्ति में चिरायु चौथे आवृत्ति में उत्क्रम से दीर्घायु पाँचवीं आवृत्ति में मध्यमायु और छठी आवृत्ति में अल्पायु समझना चाहिये।।६३।।✿ ✿ वर्षण्याहं— शराः दिशास्तिथयः नखाः तिथयः दश एवं षडिति।