बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
पृष्ठ 732, कुल 800 में से
संदर्भ में पढ़ें७२० • बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । जो हो उन अंशों में जन्म होने से पाप शुभ ।।९७।। मिश्रे तु मिश्रं त्वाधिकवशादेव निर्णयः । मिश्रक्रिया ग्रहानुसार होती हैं। वर्णाश्रमाचारविहीबुद्धिः स्त्रियांचपापी परदारसक्तः । क्षेत्रापहारी च परस्वसर्वं निहत्य योगं सकलं करोति ।।९८।। वर्ण और आश्रम के आचार में हीन बुद्धिवाला, स्त्रियों के प्रति पाप बुद्धि वाला, परस्त्रीगामी, दूसरे की भूमि को अपहरण करने वाला, दूसरे के सर्वस्व को अपहरण करने वाला।।९८।। परस्यचोत्कर्षविघातकारी विषाग्निदः घातककर्मकृच्च । ग्रामस्य देशस्य च विप्रवर्यः धनापहारी व्यसनेकृतार्थः ।।९९।। दूसरे के उत्कर्ष को नाश करने वाला, विष और अग्नि को देने वाला, ग्राम को जलाने वाला, ब्राह्मण और देवता के धन को हरण करने वाला पातक कर्म करने वाला होता है ।।९९।। मृतिप्रदं कर्मकरोति सूर्यात्प्राप्यप्रकाशः सितशीतगोश्च । दयारतो दानरतः सुतेजाः स्वाचारपाला विजितेन्द्रियश्च ।।१००।। सूर्य हो तो मारण कर्म करने वाला, चंद्रमा और शुक्र हो तो प्रसिद्ध होता है। भौम से दयारत, दानरत, सुन्दर तेजवान्, आचारयुक्त, इन्द्रियों को जीतने वाला।।१००।। इष्टं च पूर्तं च करोति जीवे शुक्रेवदान्यः कृतदारशीलः ।।१०१।। गुरु हो तो इष्टापूर्त कर्म करने वाला, शुक्र हो तो दाता, शनि हो तो स्त्रीशील हो।।१०१।। अथ मेषादि राशीनां फलानि। मेषे त्वगम्यागमनप्रियश्च त्वभक्ष्यक्ष्योवृषभेसुशीलः । देवेशदेवालयधर्मकारी युग्मेविरक्तोऽत्यधनैर्विहीनः ।।१०२।। मेष राशि में जन्म हो तो अगम्यागमन, अभक्ष्य को भक्षण करने वाला वृष राशि में अच्छा स्वभाव, शिव, विष्णु का उपासक, मिथुन राशि में वैराग्य युक्त।।१०२।। चान्द्रे च तीव्रं च करोतिपापं परस्वहर्तापि च पूर्वकारी । सिंहे तु देवस्य विघातकारी पाथोनके धर्मरतिः सुकृत्यः ।।१०३।।